संधि पर शनिवार को ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जारीफ और तेहरान यात्रा पर आए चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने दस्तखत किए। ईरान ने कहा है कि इस संधि दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंध को गहरा बनाने का दस्तावेज है। इसमें व्यापार, आर्थिक और परिवहन संबंधी सहयोग का पूरा रोडमैप है।
2016 में जिनपिंग ने की थी तेहरान यात्रा
वैसे चीन-ईरान व्यापक रणनीतिक साझेदारी समझौते का इरादा सबसे पहले 2016 में ही जताया गया था, जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने तेहरान की यात्रा की थी। इस समझौते को औपचारिक रूप दिया गया है। इस करार का मतलब यह है कि ईरान की चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना में अब पूर्ण भागीदारी बन जाएगी। बेल्ट एंड रोड इनिशियेटिव परियोजना के तहत चीन अपने सहयोगी देशों तक अलग व्यापार मार्ग बना रहा है। वह उन देशों में इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं भी चला रहा है।
ईरान-चीन समझौते पर दस्तखत उस समय हुए हैं, जब दुनिया का ध्यान स्वेज नहर की घटना पर टिका हुआ है। नहर के जरिए होने वाला परिवहन एक विशाल कंटेनर जहाज के फंस जाने के कारण बाधित हुआ है। ऐसे में अलग-अलग व्यापार मार्गों की जरूरत दुनिया भर में महसूस की जा रही है।
चीन के विदेश मंत्री वांग ने किया यह कटाक्ष
गुजरे दशकों में चीन ईरान का एक बड़ा व्यापार भागीदार बन कर उभरा है। जिस समय अमेरिका और उसके साथी देशों ने उस पर प्रतिबंध लगाए, चीन उसका बड़ा सहारा रहा है। अब चीन को अपनी इस भूमिका का लाभ मिला है। संधि पर दस्तखत के समय चीन के विदेश मंत्री वांग ने ईरान की स्वतंत्र विदेश नीति की तारीफ की। उन्होंने कटाक्ष किया कि ईरान उन देशों में नहीं है, जिनकी नीति सिर्फ एक फोन कॉल से बदल जाती है।