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China: चीन का अजीब तरीका, फिलीपीन्स के राष्ट्रपति की बीजिंग यात्रा से पहले बढ़ाया तनाव?

Sat, 31 Dec 2022 04:24 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

तनाव बढ़ने के कारण फिलीपीन्स की सेना ने दक्षिण चीन सागर में अपनी चौकसी बढ़ा दी है। तनाव की शुरुआत विवादित इलाके में चीनी जहाजों के पहुंचने और वहां लैंडफिल कार्य (कचरा डालने) शुरू करने से हुई।
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शी जिनपिंग - फोटो : PTI
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विस्तार
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चीन ने अब सीमाई विवाद में फिलीपीन्स के खिलाफ मोर्चा खोल लिया है। यहां इस बात को लेकर हैरत का माहौल है कि जिस समय फिलीपीन्स के राष्ट्रपति फर्डिनैंड मार्कोस जूनियर अपनी बीजिंग यात्रा की तैयारियों में जुटे हैं, समुद्री सीमा संबंधी विवाद को लेकर चीन ने तनाव बढ़ा दिया है। फिलहाल, फिलीपीन्स सरकार ने कहा है कि राष्ट्रपति मार्कोस जूनियर तय कार्यक्रम के मुताबिक अगले हफ्ते बीजिंग जाएंगे। वहां वे दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के समाधान के लिए संवाद का नया माध्यम कायम करने पर जोर डालेंगे। 

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फिलीपीन्स ने बढ़ाई चौकसी
तनाव बढ़ने के कारण फिलीपीन्स की सेना ने दक्षिण चीन सागर में अपनी चौकसी बढ़ा दी है। तनाव की शुरुआत विवादित इलाके में चीनी जहाजों के पहुंचने और वहां लैंडफिल कार्य (कचरा डालने) शुरू करने से हुई। खबरों के मुताबिक चीन के मछली मारने वाले वे जहाज वहां गए, जिन पर चीन के सशस्त्र गार्ड मौजूद थे। ये जहाज समुद्र के बीच चट्टान वाली चार विवादित जगहों पर भी गए। फिलीपीन्स की सेना ने चीनी जहाजों के वहां पहुंचने की पुष्टि बीते हफ्ते की थी। तब से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है।
 

काफी पुराना है दोनों देशों के बीच सीमा विवाद 
दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपीन्स का सीमाई विवाद काफी पुराना है। खबरों के मुताबिक इस महीने चीनी वाहनों ने वहां उन इलाकों में कई बार घुसपैठ की है, जिन्हें फिलीपीन्स अपना मानता है। फिलीपीन्स के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया है कि चीन दक्षिण चीन सागर से संबंधित पक्षों की तरफ से जारी आचरण घोषणापत्र का खुला उल्लंघन कर रहा है। इस घोषणापत्र पर चीन और दस दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संघ- आसियान ने 2016 में दस्तखत किए थे। इसके पहले हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने निर्णय दिया था कि दक्षिण चीन सागर के ज्यादातर हिससों पर ऐतिहासिक अधिकार होने के चीन के दावे का कोई वैधानिक आधार नहीं है। 

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अमेरिका ने किया फिलीपीन्स का समर्थन 

ताजा विवाद भड़कने के बाद मनीला स्थित चीनी दूतावास ने लैंडफिल कार्य करने का खंडन किया। उसने इसे ‘फेक न्यूज’ करार दिया है। इस बीच अमेरिका ने इस विवाद में फिलीपीन्स का समर्थन किया है। उसने चीन से कहा है कि वह दक्षिण चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करे। यहां कूटनीतिक हलकों में राय जताई गई है कि राष्ट्रपति मार्कोस जूनियर के बीजिंग जाने से ठीक पहले यह विवाद बढ़ा कर चीन ने इस यात्रा को उलझा दिया है। कुछ मीडिया टिप्पणियों में कयास लगाए गए हैं कि चीन ने जानबूझ कर इस समय तनाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है, ताकि मार्कोस जूनियर की यात्रा के दौरान वह मनचाहे समझौते के लिए उन पर दबाव बढ़ा सके।  

खबरों के मुताबिक तीन जनवरी से शुरू हो रही मार्कोस की यात्रा के दौरान फिलीपीन्स और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच संवाद का नया माध्यम बनाने के समझौते पर दस्तखत होंगे। इस बारे में अभी ब्योरा सामने नहीं आया है। सिर्फ यह बताया गया है कि इससे दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच सभी स्तरों पर सीधी वार्ता का माध्यम अस्थित्व में आ जाएगा। फिलीपीन्स और चीन के बीच खास विवाद दक्षिण चीन सागर में स्थित स्प्रेटली द्वीपों को लेकर रहा है। चीन इन्हें नान्शा द्वीप नाम से पुकारता है। फिलीपीन्स ने आरोप लगाया है कि इस द्वीप के पास चीन फिलीपीन्स के जहाजों को धमकाने की कोशिश कर रहा है।

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