चीन ने सोमवार को अमेरिका के कुछ कर्मियों पर वीजा प्रतिबंध लगा दिए हैं। चीन का ये प्रतिबंध उन अमेरिकी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ लिया गया है जो, चीन के अनुसार, तिब्बत (चीन का शिजांग) से जुड़े मुद्दों पर बड़ी कार्रवाई में शामिल रहे हैं। बता दें कि चीन द्वारा लिया गया ये फैसला वाशिंगटन द्वारा चीनी अधिकारियों पर लगाए गए अतिरिक्त वीजा प्रतिबंधों के जवाब में लिया गया है।
बता दें कि तिब्बत को लेकर लंबे समय से अमेरिका और चीन के बीच राजनयिक तनाव बना हुआ है। अमेरिका ने चीन पर यह आरोप लगाया है कि वह तिब्बती लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता पर पाबंदियां लगाता है, जबकि चीन इसे झूठा प्रचार मानता है और तिब्बत को अपना अभिन्न हिस्सा बताता है।
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चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का बयान
मामले में जानकारी देते हुए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि तिब्बत चीन का आंतरिक मामला है और इसमें किसी बाहरी दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह प्रतिबंध अमेरिका की ओर से हाल ही में चीनी अधिकारियों पर लगाए गए वीजा प्रतिबंधों के जवाब में लगाए गए हैं।
साथ ही लिन जियान ने आगे कहा कि हम स्वागत करते हैं कि विदेशी लोग शिजांग (तिब्बत) आएं, यात्रा करें और व्यापार करें, लेकिन हम इसका विरोध करते हैं कि कोई मानवाधिकार या संस्कृति के नाम पर हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करे। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग तिब्बत की यात्रा को हस्तक्षेप और तोड़फोड़ का जरिया बनाना चाहते हैं, जिसे चीन स्वीकार नहीं करेगा।
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अमेरिका ने क्यों लगाया प्रतिबंध, समझिए
गौरतलब है कि अमेरिका ने 31 मार्च को एक बयान में कहा था कि वह ऐसे चीनी अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध लगाएगा, जो तिब्बती इलाकों में विदेशी पत्रकारों, पर्यटकों और पर्यवेक्षकों के प्रवेश को रोकने में शामिल हैं। यह कदम 2018 के पारस्परिक तिब्बत पहुंच अधिनियम के तहत उठाया गया, जिसके अनुसार अगर चीन अमेरिकी नागरिकों को तिब्बत जाने से रोकता है, तो उसे भी इसी तरह की कार्रवाई का सामना करना होगा।