पश्चिम एशिया में हालिया युद्ध के बीच ईरान की सैन्य क्षमताओं को लेकर एक अहम और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने गुप्त रूप से चीन से एक जासूसी सैटेलाइट हासिल किया, जिसके जरिए उसने पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की निगरानी की और हमलों के लिए रणनीतिक जानकारी जुटाई।
रिपोर्ट में लीक हुए ईरानी सैन्य दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया गया है कि आईआरजीसी के कमांडरों ने इस सैटेलाइट को सीधे निर्देश देकर पश्चिम एशिया में मौजूद प्रमुख अमेरिकी सैन्य ठिकानों की निगरानी करवाई। दस्तावेजों में समय-चिह्नित कोऑर्डिनेट्स, सैटेलाइट इमेजरी और ऑर्बिटल एनालिसिस शामिल हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि निगरानी बेहद व्यवस्थित और योजनाबद्ध तरीके से की गई।
बताया गया है कि सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें मार्च महीने में उन ठिकानों की हैं, जहां ड्रोन और मिसाइल हमले हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार, हमलों से पहले और बाद की तस्वीरों का विश्लेषण भी किया गया, जिससे यह समझा जा सके कि हमले कितने प्रभावी रहे। हालांकि, रॉयटर्स इस रिपोर्ट की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है, जिससे इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस समझौते के तहत ईरान को बीजिंग स्थित सैटेलाइट कंट्रोल और डेटा सर्विस देने वाली कंपनी एम्पोसैट के कमर्शियल ग्राउंड स्टेशनों तक पहुंच भी दी गई। इन ग्राउंड स्टेशनों का नेटवर्क एशिया, लैटिन अमेरिका और अन्य क्षेत्रों तक फैला हुआ है, जिससे सैटेलाइट संचालन और डेटा ट्रांसमिशन में ईरान को बड़ी तकनीकी बढ़त मिली।
सैटेलाइट द्वारा ली गई तस्वीरों में सऊदी अरब का प्रिंस सुल्तान एयर बेस प्रमुख रूप से शामिल है, जिसकी तस्वीरें 13, 14 और 15 मार्च को ली गई थीं। 14 मार्च को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की थी कि इस एयर बेस पर मौजूद अमेरिकी विमानों को हमले में नुकसान पहुंचा।