चीन के पास मौजूद भू-स्थित अंतर-महाद्वीपीय मिसाइल (आईसीबीएम) लॉन्चरों की संख्या अमेरिका से ज्यादा हो गई है। इस बारे में अमेरिकी सेना ने अमेरिकी कांग्रेस (संसद) को सूचित किया है। इससे यहां रणनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर चर्चा शुरू हो गई है कि चीन का जवाब देने के लिए अमेरिका को क्या कदम उठाने चाहिए।
अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपी एक खास खबर के मुताबिक अमेरिका के स्ट्रेटेजिक कमांड ने इस बारे में सीनेट की सशस्त्र सेना समितियों को पत्र भेजा है। यह पत्र पिछले 26 जनवरी को भेजा गया था। स्ट्रेटेजिक कमांड ही अमेरिका की परमाणु शक्ति की देखरेख करता है। उसने अपने पत्र में लिखा है- ‘चीन के पास मौजूद फिक्स्ड और मोबाइल आईसीबीएम लॉन्चरों की संख्या अमेरिका से अधिक हो गई है।’
रणनीति विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि रूस की परमाणु शक्ति का मुकाबला करने की चुनौती पहले से ही अमेरिका के सामने है। अब चीन के परमाणु हथियारों की संख्या भी बढ़ने की खबरें आ रही हैं। स्ट्रेटेजिक कमांड ने अपने पत्र में यह लिखा है कि अमेरिका के पास जमीन से दागी जाने वाली आईसीबीएम की संख्या चीन से ज्यादा है। उनके जरिए वह अधिक संख्या में परमाणु हथियार दाग सकता है। लेकिन लॉन्चरों के मामले में चीन ने बढ़त बना ली है।
कमांड ने कहा है कि पनडुब्बियों से दागी जाने वाली मिसाइलों के मामले में भी अमेरिका की बढ़त कायम है। इसके बावजूद रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने कहा है कि लॉन्चरों की संख्या बढ़ाना चीन की बढ़ती महत्त्वाकांक्षाओं का संकेत है। इसे देखते हुए अमेरिका को अपने परमाणु हथियारों की संख्या में तुरंत बढ़ोतरी शुरू करनी चाहिए। हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य माइक रोजर्स ने कहा है- ‘चीन बढ़त बना ले, हम ऐसा नहीं होने दे सकते हैं। अब समय आ गया है., जब हम अपनी ताकत, तेवर और क्षमताओं में मौजूद खतरे के अनुपात में वृद्धि करें।’ रोजर्स सदन की सशस्त्र सेना समिति के अध्यक्ष हैं।
लेकिन अस्त्र नियंत्रण समर्थक विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका को हथियारों की होड़ में फंसने के बजाय इस होड़ पर रोक लगाने के लिए चीन और रूस के साथ बातचीत शुरू करनी चाहिए। उसे इस बात का प्रयास करना चाहिए कि चीन भी परमाणु हथियार नियंत्रण से संबंधित वार्ताओं में शामिल हो। इन विशेषज्ञों ने हथियारों की संख्या घटाने के लिए पहले हुई संधि- स्ट्रेटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (स्टार्ट) के नए संस्करण के लिए काम करने की सलाह दी है।
स्टैनफॉर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े विशेषज्ञ रोज गोटमोयलर ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा- ‘यह हमारे राष्ट्रीय हित में है कि हम रूस को नई स्टार्ट संधि की सीमाओं के अंदर रखें। हमें अपने परमाणु हथियारों का आधुनिकीकरण उसी योजना के तहत करना चाहिए, ना कि हथियारों का जखीरा खड़ा करते जाना चाहिए।’ गोटमयलर स्टार्ट के लिए हुई वार्ताओं में शामिल रहे थे।
जानकारों के मुताबिक बाइडन प्रशासन परमाणु शक्ति को बढ़ाने और अस्त्र नियंत्रण की व्यवस्थाओं के लिए वार्ता को आगे बढ़ाने की मिली-जुली रणनीति पर चल रहा है। वह चुनौती से वाकिफ है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय पेंटागन ने परमाणु शक्ति संबंधी अपनी समीक्षा में पिछले साल कहा था- ‘साल 2030 तक पहली बार ऐसी स्थिति बनेगी, जब अमेरिका को परमाणु संपन्न दो बड़ी शक्तियों और संभावित शत्रुओं का सामना करना पड़ेगा।’