राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन ने अधिक 'रणनीतिक स्वायत्तता' हासिल करने के अलावा बढ़े हुए अंतरराराष्ट्रीय प्रभाव के साथ एक 'प्रमुख जिम्मेदार देश' के रूप में उभरा है। बीजिंग में 2023 विदेश नीति परिणामों पर आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में यह जानकारी साझा की गई।
इस बैठक के अंत में जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। इसमें राष्ट्रपति शी ने बुधवार और गुरुवार को यहां विदेश मामलों से संबंधित कार्य पर केंद्रीय सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण भाषण दिया।प्रधानमंत्री ली कियांग की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में विदेश मंत्री वांग यी के अलावा सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) के शीर्ष अधिकारी समेत सेना और चीन के दूतों और दुनियाभर के वरिष्ठ वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों ने भाग लिया। बयानों में आगे कहा गया कि चीन अंतरराष्ट्रीय प्रभाव में वृद्धि, नए प्रयासों को चलाने की मजबूत क्षमता और अधिक नैतिक अपील के साथ एक जिम्मेदार प्रमुख देश बन गया है।
इस बैठक में पिछले वर्ष में हुई चीन की कूटनीतिक प्रगति के बारे में चर्चा की गई। रिपोर्ट के मुताबिक यहां चीनी विशेषताओं के साथ प्रमुख देशों की कूटनीति में नई संभावनाएं खोली हैं। इसके अलावा उनकी कूटनीति में बहुत अधिक रणनीतिक स्वायत्तता और पहल हासिल की है।
विभिन्न देशों के साथ की चीन के राजनायिक संबंधों की समीक्षा
हालांकि, शी के संबोधन का विवरण सामने नहीं आया है, लेकिन बताया गया है कि उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध को लेकर भारत के साथ साधे गए संबंधों के बीच अमेरिका सहित विभिन्न देशों के साथ चीन के राजनयिक संबंधों की समीक्षा की थी।
आधिकारिक बयान के अनुसार अपने भाषण में, राष्ट्रपति शी ने नए युग में चीनी विशेषताओं के साथ प्रमुख देशों की कूटनीति की ऐतिहासिक उपलब्धियों और मूल्यवान अनुभव की व्यवस्थित रूप से समीक्षा की। उन्होंने नई यात्रा में अंतरराष्ट्रीय माहौल और चीन के बाहरी काम के ऐतिहासिक मिशन के बारे में विस्तार से बताया। वर्तमान और भविष्य में चीन के बाहरी काम के लिए व्यापक योजनाएं बनाईं।
70 वर्षीय शी सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक माओत्से तुंग के बाद एकमात्र चीनी नेता हैं, जो पार्टी के मुख्य नेता के रूप में उभरने के बाद अभूतपूर्व तीसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए सत्ता में बने रहे। दुनियाभर में चीन के राजनयिक और सैन्य दबदबे पर जोर दे रहे हैं। जब से उन्होंने 2012 में सत्ता संभाली है।