अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अकेले लिए जाने वाले फैसलों और तमाम ऐतराज के बावजूद अब यूरोपीय संघ (ईयू) और चीन एक दूसरे के ज्यादा करीब आने लगे हैं। जर्मनी, फ्रांस और ईयू के शीर्ष नेताओं ने नई वैश्विक व्यवस्था शुरू करने के इरादे से चीन के साथ अभूतपूर्व वार्ता शुरू की है। यह बातचीत अमेरिका के लिए सीधा संदेश भी है।
फ्रांस की राजधानी पेरिस पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने के लिए जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल और ईयू आयोग के अध्यक्ष जॉ क्लोद युंकर भी पहुंचे। इसके बाद मर्केल, युंकर और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी चर्चा की। इसी वार्ता में मैक्रों ने चीन से ईयू की एकता और दुनिया में उसके मूल्यों का आदर करने की अपील भी कर डाली।
उधर, शी जिनपिंग ने यह मानते हुए कि चीन और यूरोपीय संघ एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी हैं, कहा कि दोनों शक्तियां साथ में प्रगति कर रही हैं। मर्केल ने कहा, यदि चीन-अमेरिका के बीच ट्रेड वार्ता असफल रही तो इसका असर जर्मनी और ईयू पर भी पड़ेगा।
ईयूू आयोग अध्यक्ष जॉ क्लोद युंकर ने कहा, हम चीन के साथ मिलकर महान कर सकते हैं। ईयू-चीन में यह नजदीकी अमेरिका के लिए सीधा संकेत है कि वह ट्रेड वॉर में पूरी दुनिया को चुनौती न दे। दरअसल ईयू में चीनी कंपनियों के बढ़ते अधिग्रहणों पर चिंता का माहौल है और यूरोप विदेशी निवेश पर नियंत्रण के लिए सख्त नियमों पर विचार कर रहा है। लेकिन अमेरिकी दादागिरी के चलते ये देश करीब आ रहे हैं।
कई बड़े समझौतों पर हुए दस्तखत
इस वार्ता से पहले चीन-फ्रांस ने दर्जनों कारोबारी समझौतों का एलान किया। इनमें सबसे बड़ा सौदा 300 एयरबस विमानों का है। बीजिंग ने कुल 290 एयरबस (ए-320) और 10 एयरबस (ए-350 विमान) खरीदेगा। इसके अलावा दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा, सांस्कृतिक आदान प्रदान और स्वच्छ ऊर्जा के समझौते भी हुए हैं। जर्मनी और ईयू के साथ भी कुछ समझौतों पर वार्ता हुई है।