अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा अफगानिस्तान से फौज की वापसी के बीच चीन अफगानिस्तान में अपने प्रभाव विस्तार में जुट गया है। चीन ने अफगानिस्तान के साथ सुरक्षा और आर्थिक सहयोग बढ़ाने का अनुरोध किया है। चीन, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की बृहस्पतिवार को वीडियो कांफ्रेंस के जरिये बैठक हुई।
इस बैठक में अमेरिकी सैनिकों की वापसी व्यवस्थित तरीके से होने को लेकर तीनों देशों के बीच सहमति बनी। तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने अफगानिस्तान में अमेरिकी फौजों की वापसी के बाद एक नई उदारवादी मुस्लिम नीति पर बल दिया।
तीनों देशों में इस बात पर सहमति बनी कि अफगानिस्तान से विदेशी सैनिकों की वापसी जिम्मेदार और व्यवस्थित तरीके से होनी चाहिए, ताकि सुरक्षा खतरे न पड़े और आतंकियों को वापसी करने का मौका न मिले। चीन के विदेश मंत्री वांग यी के हवाले से कहा है कि अफगानिस्तान और इस क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। तीनों देशों को अफगानिस्तान और पड़ोसी देशों के हितों की रक्षा के लिए संपर्क और सहयोग बढ़ाने की जरूरत है।
इस बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि अफगानिस्तान की शांति के लिए पाकिस्तान और चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों में मजबूती और अफगानिस्तान में स्थिरता जरूरी है। उन्होंने कहा कि हम तीनों को मिलकर ये देखना होगा कि इन हालातों में साथ मिलकर हम कैसे इस काम को अंजाम दे सकते हैं और अपने साझा लक्ष्यों को कैसे प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने अफगानिस्तान में शांति बहाली के लिए राजनीतिक स्थिरता को जरूरी बताया।
गौरतलब है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी, चीनी विदेश मंत्री वांग यी और अफगानिस्तान के विदेश मंत्री हनीफ अतमर ने चौथे संवाद कार्यक्रम में भाग लिया था। पाक विदेश मंत्री ने बैठक को लेकर ट्वीट भी किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हमेशा से ही चीन और अफगानिस्तान के साथ मजबूत संबंधों का पक्षधर रहा है।