चीन की तरफ से पोतों की तैनाती।
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चीन ने ताइवान के साथ-साथ दक्षिण चीन सागर में भी अपनी ताकत का प्रदर्शन जारी रखा है। ताजा घटनाक्रम में उसने क्षेत्र के पास ही जापान के अधिकार वाले एक द्वीप के करीब 90 नौसैनिक और कोस्ट गार्ड्स से जुड़े पोत भेजे दिए हैं। ताइवान के रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, बीते तीन दशकों में यह चीन की तरफ से सबसे बड़ी तैनाती है।
ताइवान के अधिकारियों का कहना है कि चीन का यह कदम जापान के करीब सैन्य अभ्यास की तरह है। हालांकि, चीन ने अब तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि वह क्षेत्र में युद्धाभ्यास कर रहा है या नहीं।
ताइवान के रक्षा मामलों से जुड़ी प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए एक अधिकारी ने कहा, "बीजिंग के अभियान न सिर्फ ताइपे को निशाना बना रहे हैं, बल्कि वह क्षेत्र में मौजूद देशों को भी अपनी क्षमता दिखाने की कोशिश हैं। खासकर जापान और फिलीपींस को, ताकि वह ताइवान की रक्षा के लिए आगे न आ पाएं।"
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सुन ली-फैंग ने कहा, "चीन की ओर से मौजूदा समय में नौसैन्य तैनाती उसके बीते चार युद्धाभ्यासों से ज्यादा है।" उन्होंने कहा, "ताइवान के आसपास के क्षेत्रों में आवाजाही रोकने के साथ ही चीन पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में दो दीवारें बना रहा है। वह ताइवान के हवाई रक्षा पहचान क्षेत्र के पूर्वी छोर और प्रशांत महासागर में एक और जगह बड़ी संख्या में पोतों को तैनात कर रहा है।"
उन्होंने आगे कहा, "इन दो दीवारों के जरिए चीन साफ संदेश दे रहा है: ताइवान जलडमरूमध्य हमारा क्षेत्र है और इसके आसपास के मुद्दे चीन की सेना- पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और देश की सरकार संभालेगी।" गौरतलब है कि ताइवान अपने आसपास चीनी युद्धाभ्यास के मद्देनजर टकराव की स्थिति के लिए तैयारियां कर रहा है। पिछले महीने ताइवान के राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते के प्रशांत क्षेत्र में दौरे के बाद से ही चीन भड़का हुआ है। ताइवानी राष्ट्रपति का यह विदेश दौरा अमेरिका के गुआम क्षेत्र और हवाई तक था।