अमेरिका शुरू से ही कहता रहा है कि चीन न सिर्फ पूरी दुनिया में कोरोना प्रसार का जिम्मेदार रहा है बल्कि जल्दबाजी में चीन ने जो टीका विकसित किया है वह भी असरकारी नहीं है। अब चीन के शीर्ष रोग नियंत्रक अधिकारी ने पहली बार यह मान लिया है कि देश में विकसित कोविड-19 टीके की प्रभावशीलता कम है और सरकार उसे बढ़ावा देने के लिए मिश्रण करने पर विचार कर रही है।
चीन के रोग नियंत्रण केंद्र (सीडीसी) के निदेशक गाओ फू ने चेंगदू शहर में एक सम्मेलन के दौरान कहा कि चीनी वैक्सीन की सुरक्षा दर बहुत उच्च स्तर की नहीं है, इसमें और सुधार की जरूरत हो सकती है। यह बयान ऐसे वक्त पर आया है जब चीन सरकार द्वारा सिनोवैक और सिनोफार्म की करोड़ों खुराकें कई देशों वितरित की जा चुकी है। इनमें मेक्सिको, तुर्की, इंडोनेशिया, हंगरी और ब्राजील शामिल हैं।
गाओ ने कहा, हम गंभीरता से विचार कर रहे हैं कि क्या हमें टीकाकरण प्रक्रिया के लिए अलग-अलग टीकों का इस्तेमाल करना चाहिए। जब गाओ से फोन पर टिप्पणी मांगी गई तो उन्होंने इनकार कर दिया। लेकिन एक अन्य सीडीसी अधिकारी ने वांग हुआक्विंग ने कहा, हमारे देश में विकसित एमआरएनए वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल में प्रवेश कर चुकी है। बता दें कि एमआरएनए तकनीक का इस्तेमाल पश्चिमी देशों के टीका निर्माता करते हैं।
पश्चिमी टीकों पर संदेह पैदा करने की कोशिश
चीन ने पाकिस्तान, मेक्सिको, तुर्की, इंडोनेशिया, हंगरी, यूएई और ब्राजील को अपने टीकों की करोड़ों खुराकें देते हुए पश्चिमी देशों के टीकों के प्रभाव पर शुरू से संदेह जताया है। वह फाइजर टीके की प्रभावशीलता पर भी शक पैदा करने की कोशिश में जुटा है। जबकि चीन ने अपने सिनोवैक व सिनोफार्म टीकों के विस्तृत मानव परीक्षण का डाटा जारी नहीं किया है। इस कारण उसकी विश्वसनीयता पहले से दांव पर लगी हुई है।
कई देशों को रहीं शिकायतें
चीन से टीका लेने वाले कुछ देश सिनोवैक व सिनोफार्म पर संदेह जता चुके हैं। यूएई ने हाल ही में चीनी सिनोफार्म टीके की डोज दो से बढ़ाकर तीन करने का फैसला लिया क्योंकि कुछ लोगों में कम एंटी बॉडीज कम बनीं। सिंगापुर ने सिनोवैक खुराक एकत्रित करने के बावजूद इसका इस्तेमाल नहीं किया। जबकि ब्राजील में सिनोवैक को 50 फीसदी से थोड़ा ज्यादा और तुर्की में 83.5 फीसदी तक यह प्रभावी पाया गया।
चीनी टीका बना रहे ब्राजील पर भी असरकारी नहीं
कोरोना से जूझ रहे ब्राजील में रविवार को 1,803 लोगों की मौत हो गई जबकि इसी दिन 37,000 केस भी सामने आए। जबकि चीन से खरीदा गया टीका ब्राजील में सिर्फ 50.7 फीसदी लोगों पर ही प्रभावी रहा है। ब्राजील के साओ पाउलो बुटांटन बायोमेडिकल इंस्टीट्यूट ने इसकी पुष्टि की है। यह वही संस्थान है जो फिलहाल देश में चीनी टीके का उत्पादन कर रहा है।
भारत की दमखम से होगी वापसी : डेलॉयट सीईओ
परामर्श सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनी डेलॉयट के सीईओ पुनीत रंजन ने कहा है कि भारत पूरे दमखम के साथ कोविड-19 संकट से उबरेगा और 21वीं सदी निश्चित ही ‘भारत की सदी’ है। रंजन ने कहा कि भारत ने कोविड-19 से पैदा चुनौतियों का सामना करने में अच्छा प्रदर्शन किया है। रोहतक में जन्मे भारतवंशी सीईओ 2015 से डेलॉयट की कमान संभाल रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की हालिया रिपोर्ट का भी जिक्र किया, जिसमें भारत के लिए 12.5 प्रतिशत वृद्धि दर का अनुमान लगाया गया था। उन्होंने कहा, भारत इस महामारी से सबसे तेजी से उबरेगा और मुझे लगता है कि बहुत तेजी से अर्थव्यवस्था की भी भरपाई होगी। भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और डेलॉइट के रूप में मैं भारत को लेकर आशावादी हूं।
कोविड-19 जैसी महामारी नहीं देखी : डॉ. कूवाडिया
भारतीय मूल के प्रख्यात दक्षिण अफ्रीकी शिक्षाविद् प्रोफेसर हुसैन मोहम्मद ‘जेरी’ कूवाडिया ने कहा है कि कोविड-19 जैसी महामारी उन्होंने अपने छह दशक के कार्यकाल में कभी नहीं देखी। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘पीडिएट्रिक्स एंड चाइल्ड हेल्थ’ के सातवें संस्करण के विमोचन के बाद डरबन में यह बात कही। डॉ. कूवाडिया ने कहा, कोरोना वायरस लंबे समय से मौजूद था लेकिन कोविड-19 जैसी बीमारी कभी नहीं देखी। डॉ. कूवाडिया मां से बच्चे को एचआईवी/एड्स होने संबंधी उनके अहम शोध के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं।