पिछले कुछ वर्षों में ताइवान का भविष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का एक गंभीर मुद्दा बन कर उभरा है। चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ताइवान के अधिकार क्षेत्र वाले हवाई और समुद्री क्षेत्र में लगातार घुसपैठ कर रही है। इसके साथ ही ताइवान पर चीन के हमले की आशंकाएं भी बढ़ी हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका ने इसे लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
अमेरिकी हिंद-प्रशांत कमांड के प्रमुख एडमिरल फिलिप डेविडसन ने अमेरिका की कांग्रेस को चेतावनी दी है कि साल 2027 या उससे पहले ताइवान पर चीन की ओर से हमला हो सकता है। फिलिप ने कहा कि चीन 2050 तक अमेरिका और नियम आधारिक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में हमारी नेतृत्व की भूमिका को बदलने के लिए कोशिशें तेज कर रहा है।
एडमिरल फिलिप के अनुसार इससे पहले चीन की महत्वाकांक्षा में ताइवान साफ तौर पर आता है। मुझे लगता है कि इस दशक के दौरान खतरा प्रकट हो गया है, शायद अगले छह साल में ही इसका परिणाम देखने को मिले। उन्होंने कहा कि चीन यथास्थिति में बदलाव के लिए एकतरफा कार्रवाई कर सकता है। हमें ऐसी स्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए।
चार दिसंबर को ताइवान के पास दिखे थे चीन के विमान
इसके अलावा अमेरिका के रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने भी कहा था कि चार दिसंबर को चीनी सेना के कुछ विमान ताइवान के पास देखे गए थे। उन्होंने कहा था मैं कोई अनुमान नहीं लगाना चाहता हूं लेकिन निश्चित तौर पर यह एक अभ्यास की तरह लग रहा है। बीते दिनों सामने आई पेंटागन की एक रिपोर्ट में भी चीनी आक्रामकता को लेकर चेतावनी दी गई थी।
पीएलए पर अमेरिकी सेना के पूर्व विशेषज्ञ डेनिस ब्लास्को का कहना है कि चीन के राष्ट्रपति पीएलए को मजबूत करने प्रमुखता दे रहे हैं और उसके पीछ कुछ कारण हैं। पहला कारण चीन को किसी हमले बचाने के लिए। दूसरा कारण ताइवान को आजादी की ओर और कोई कदम बढ़ाने से रोकने और ताइवान के समर्थन में अमेरिका की मदद को रोकना है।