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China BRI Project: बीआरआई का संकट में फंसना अमेरिका के लिए है एक अवसर

Wed, 24 Aug 2022 06:05 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग

सार

China BRI Project: विश्लेषकों के मुताबिक चीनी परियोजना को लेकर गहरा रहे सवाल अमेरिका के लिए एक मौका है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने गरीब देशों में इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर अरबों डॉलर खर्च करने का इरादा जताया है...
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China BRI Project - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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चीन की महत्त्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) परियोजना का संकट बढ़ता जा रहा है। इससे इस प्रोजेक्ट के भविष्य पर अब गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। साथ ही ये मुद्दा भी चर्चा में आ गया है कि क्या चीनी परियोजना के संकट का लाभ उठा कर अमेरिका अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को दुनिया भर में फैला सकेगा।

डाटा रिसर्च करने वाली संस्था एडडाटा के चाइनीज डेवलमेंट फाइनेंस प्रोग्राम के प्रमुख अम्मार ए मलिक ने बताया है- ‘हमने अपने अनुसंधान के दौरान पाया कि 35 फीसदी बेल्ट एंड रोड परियोजनाएं किसी ना किसी प्रकार की अमल संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही हैं।’ मलिक के मुताबिक पर्यावरण संबंध हादसों, भ्रष्टाचार घोटालों और श्रम कानून के उल्लंघन जैसे मामले खड़े होने से इन परियोजनाओं के आगे मुश्किलें पेश आई हैं।

एडडाटा ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में बताया है कि बीआरआई परियोजनाओं को ‘छिपे कर्ज’ (हिडेन डेट) की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। इन परियोजनाओं के निर्माण के लिए सरकारों ने जो कर्ज लिया है, उसके आंकड़े मौजूद हैं। लेकिन इन कार्यों से जुड़ी निजी कंपनियों ने जो कर्ज लिए हैं, उनके आंकड़े अकसर सामने नहीं आते।

विश्लेषकों के मुताबिक चीनी परियोजना को लेकर गहरा रहे सवाल अमेरिका के लिए एक मौका है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने गरीब देशों में इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर अरबों डॉलर खर्च करने का इरादा जताया है। इस वर्ष जून में उन्होंने जी-7 नेताओं के साथ अपनी शिखर बैठक के दौरान इस कार्य में 600 बिलियन डॉलर के निवेश का वादा किया। उसमें 200 बिलियन डॉलर का निवेश अकेले अमेरिका करेगा।

बाइडन ने राष्ट्रपति पद संभालने के तुरंत बाद चीनी परियोजना का जवाब देने की तैयारी शुरू कर दी ती। 2021 में जी-7 नेताओं के साथ मिल कर उन्होंने बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड नाम की परियोजना शुरू करने का एलान किया था। लेकिन साल भर तक इसमें कोई प्रगति ना होने के कारण इस वर्ष इसका नाम बदल दिया गया। अब इसका नाम पार्टनरशिप फॉर ग्लोबल इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट रखा गया है।

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी महत्त्वाकांक्षा पूरी होने में सबसे बड़ी बाधा अमेरिका की अंदरूनी व्यवस्था है। चीनी मॉडल में वहां की सरकारी कंपनियां मुख्य भूमिका निभाती हैं। वे सरकार के निर्देश के मुताबिक काम करती हैं। अमेरिका में सरकार के पास ऐसी भूमिका निभाने की सुविधा नहीं है। इसलिए अमेरिकी योजना प्राइवेट सेक्टर पर निर्भर है, जो मुनाफे की संभावना के आधार पर काम करता है।

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चीन ने बीआरआई की शुरुआत 2013 में की थी। तब से इस योजना के तहत वह अरबों डॉलर खर्च कर चुका है। इसके तहत प्रशांत क्षेत्र में स्थित पापुआ न्यू गिनी से लेकर अफ्रीकी देश केन्या, और श्रीलंका से लेकर पश्चिम अफ्रीका तक में रोड, रेल और अन्य बुनियादी ढांचों का निर्माण किया गया है। अब चीन पश्चिम एशिया और लैटिन अमेरिका में भी इस परियोजना को फैलाने की कोशिश कर रहा है।

लेकिन अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल चीन की परियोजना खतरे में पड़ी दिखती है। उसे कई देशों में राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है। चीन का प्रभाव बढ़ने और अपने देश के कर्ज जाल में फंसने की आशंका ने वहां बीआरआई के खिलाफ जनमत बना दिया है। इस स्थिति को अमेरिका और उसके साथी देशों के लिए एक अवसर माना जा रहा है।

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