बीजिंग और कैनबेरा के बीच तनाव बढ़ने के बाद चीन ने ‘चीन विरोधी’ दो ऑस्ट्रेलियाई विद्वानों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। ग्लोबल टाइम्स अखबार ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी अज्ञात स्रोतों के हवाले से दी।
सत्तारूढ़ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के आधिकारिक पीपल्स डेली अखबार द्वारा प्रकाशित पेपर ने दोनों की पहचान क्लाइव हैमिल्टन और एलेक्स जोसेक के रूप में की है। इसमें कहा गया है कि यह फैसला सितंबर की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया द्वारा घुसपैठ को लेकर दो चीनी विद्वानों के वीजा को रद्द करने के बाद किया गया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने प्रवेश प्रतिबंधों की पुष्टि नहीं की, लेकिन बृहस्पतिवार को एक नियमित ब्रीफिंग के दौरान कहा कि देश को किसी भी विदेशी नागरिक पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार है। मंत्रालय ने आपसी संबंधों में जटिलताओं के लिए ऑस्ट्रेलिया को दोषी ठहराया है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वन बिन ने कहा कि जानबूझकर चीन पर हमला, चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने या अध्ययन और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के बहाने दुष्प्रचार करने वाले किसी भी कृत्य का हम दृढ़ता से विरोध करते हैं। पिछले साल के अंत में चीन में पहली बार सामने आए कोरोना वायरस की अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए ऑस्ट्रेलिया के आह्वान और घरेलू मामलों में चीनी मध्यस्थता के आरोपों से व्यापार संबंधी विवादों के संबंध में दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं।
हैमिल्टन ने एक ईमेल में कहा कि यह प्रतिबंध काफी अप्रत्याशित है, हालांकि मैं कुछ वर्षों से बीजिंग की दुश्मन सूची में शामिल हूं। उन्होंने बताया कि उनके और जोसेक के खिलाफ प्रतिबंध, चीनी विद्वानों के खिलाफ ऑस्ट्रेलियाई सरकार के कार्यों के लिए एक बदला है। उन्होंने दो या तीन साल पहले ही यह तय कर लिया था कि चीन की यात्रा करना बहुत खतरनाक हो सकता है।