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China: चीन में तिब्बती बच्चों की धार्मिक आजादी पर सख्ती, 18 साल से कम उम्र वालों को मठों में प्रवेश पर रोक

Sun, 08 Feb 2026 05:01 PM IST
शिवम गर्ग वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

चीन सरकार ने तिब्बती क्षेत्रों में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के मठों में प्रवेश पर रोक लगा दी है। इस फैसले को तिब्बती संस्कृति और धार्मिक अधिकारों पर हमला माना जा रहा है।

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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग - फोटो : Ani Photos
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विस्तार
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चीन सरकार ने तिब्बती समुदाय के धार्मिक जीवन पर नियंत्रण और कड़ा करते हुए 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के मठों में प्रवेश पर रोक लगा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक इस फैसले से तिब्बती संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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बच्चों को मठों में जाने की अनुमति नहीं
इस प्रतिबंध की जानकारी तब सामने आई जब चीनी मैसेजिंग ऐप वीचैट पर एक वीडियो सामने आया। इसके बाद तिब्बती अधिकारों के उल्लंघन को लेकर चिंता बढ़ गई। तिब्बत और निर्वासित तिब्बतियों से जुड़े समाचार पोर्टल फायुल (Phayul) के अनुसार, खाम क्षेत्र के एक मठ के प्रवेश द्वार पर स्पष्ट रूप से लिखा नोटिस लगाया गया है '18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का मठ में प्रवेश वर्जित है।' रिपोर्ट में बताया गया है कि यह पाबंदी ऐसे समय लागू की गई है, जब तिब्बती इलाकों में सर्दियों की छुट्टियों के चलते स्कूल बंद रहते हैं। आमतौर पर इस दौरान बच्चे अपने माता-पिता के साथ मठों में धार्मिक गतिविधियों में भाग लेते थे, लेकिन अब परिवार के साथ होने पर भी बच्चों को मठों में जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

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सांस्कृतिक विरासत को कमजोर करने की कोशिश

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तिब्बत वॉच से जुड़े शोधकर्ता सोनम तोबग्याल ने इस कदम को तिब्बती सांस्कृतिक विरासत को कमजोर करने की एक सुनियोजित कोशिश बताया है। उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में चीन ने तिब्बत में कई ऐसी नीतियां लागू की हैं, जिनमें तिब्बती बच्चों के लिए अनिवार्य बोर्डिंग स्कूल, छुट्टियों के दौरान मठों में तिब्बती भाषा सिखाने पर रोक और अब बच्चों के मठों में प्रवेश पर प्रतिबंध शामिल हैं। तोबग्याल के अनुसार, ये सभी कदम बचपन के सबसे महत्वपूर्ण दौर में बच्चों को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से दूर करने की दिशा में उठाए गए हैं और इसका उद्देश्य तिब्बती पहचान को धीरे-धीरे मिटाना है।

तिब्बती समाज की सांस्कृतिक निरंतरता के लिए गंभीर चुनौती
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि तिब्बती बच्चों के लिए चलाए जा रहे सरकारी स्कूलों पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के यूनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट की सीधी निगरानी रहती है। इस व्यवस्था के तहत बच्चों को वैचारिक प्रशिक्षण दिया जाता है और उन्हें अपनी मातृभाषा छोड़कर चीनी भाषा, पहचान और राजनीतिक निष्ठा अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। आलोचकों का कहना है कि इन नीतियों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। कई अभिभावकों ने बताया है कि छुट्टियों में घर लौटने पर बच्चे आपस में चीनी भाषा में बात करते हैं और मठों में जाने को लेकर डर या झिझक महसूस करते हैं। यह स्थिति तिब्बती समाज की सांस्कृतिक निरंतरता के लिए गंभीर चुनौती मानी जा रही है।
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(इनपुट: आईएनएस)

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