अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन की टीम की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए यूरोपियन यूनियन (ईयू) चीन के साथ व्यापक निवेश करार करने को तैयार हो गया है। मिली जानकारी के मुताबिक श्रम मानकों पर पालन की शर्त को समझौते में शामिल करने पर चीन के तैयार हो गया है। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच साल 2020 खत्म होने से पहले समझौते को औपचारिक रूप देने पर सहमति बन गई।
अनेक यूरोपीय समाचार माध्यमों के मुताबिक इस बारे में ईयू के सदस्य देशों को सूचित कर दिया गया है। इसके तहत चीन जबरिया श्रम रोकने के लिए हुई अंतरराष्ट्रीय संधियों का अनुमोदन करने के लिए ठोस प्रयास करेगा। ईयू के अधिकारियों ने वेबसाइट पोलिटिको.ईयू को बताया कि महीनों चली वार्ता के बाद आखिरकार समझौते के तीन प्रमुख बिंदुओं पर राजी हो गया है।
ये बिंदु हैं - चीनी बाजार में यूरोपीय कंपनियों की पहुंच, कारोबार का समान धरातल और पर्यावरण सम्मत विकास। ईयू के अधिकारियों ने दावा किया है कि अब तक किसी दूसरे पक्ष के साथ समझौते में चीन उतनी महत्वाकांक्षी शर्तों पर राजी नहीं हुआ था, जितना वह ईयू के साथ करार में हो रहा है।
पिछले हफ्ते के शुरू में भी खबर आई थी कि चीन और ईयू के बीच समझौते पर सहमति बन गई है। लेकिन तब जो बाइडन की टीम ने ईयू को संदेश भेजा कि वह चीन के प्रति अमेरिका के साथ मिलकर साझा रुख अपनाए। बाइडन टीम ने कहा कि किसी समझौते पर दस्तखत करने के पहले ईयू को जो बाइडन के राष्ट्रपति पद संभालने तक इंतजार करना चाहिए। यही बात ईयू के सदस्य पोलैंड ने भी कही। उधर फ्रांस ने कहा कि अगर समझौते में जबरिया मजदूरी रोकने की शर्त को शामिल नहीं किया गया, तो वह समझौते को वीटो कर देगा।
अब लेकिन लगता है कि ईयू ने समझौते ने समझौते की राह में आई उपरोक्त रुकावटों को दूर कर लिया है। लंदन के अखबार द गार्जियन को ईयू के एक राजनयिक ने बताया कि ईयू देशों के राजदूतों ने मोटे तौर पर ईयू-चीन वार्ता में हुई प्रगति का स्वागत किया है। यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष ने राजदूतों के साथ बैठक के बाद कहा कि किसी देश ने समझौते को रोकने का संकेत नहीं दिया। इससे लगता है कि समझौते को ईयू देशों की सियासी हरी झंडी मिल गई है। उधर चीन के विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि चीन-ईयू वार्ता में बड़ी प्रगति हुई है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस करार से दोनों पक्षों को लाभ होगा।
यूरोपीय आयोग के अधिकारियों का कहना है कि चीन पहली बार किसी समझौते में पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी शर्तों पर राजी हुआ है। साथ ही वह श्रम मानकों पर अमल और कॉरपोरेट सोशल रेपॉन्सिबिलिटी की शर्तें समझौते पर शामिल करने पर भी सहमत हो गया है। श्रम मानकों के तहत चीन इस पर राजी हुआ है कि वह जबरिया मजदूरी संधि के प्रावधानों और जबरिया मजदूरी पर रोक संबंधी अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के नियमों का पालन करेगा।
यूरोपीय मीडिया में आई खबरों के मुताबिक समझौते को मंजूरी देने के लिए एक उच्चस्तरीय वीडियो कांफ्रेंस आयोजित की जाएगी। इसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उरसुला वॉन डेर लियेन, यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल भाग लेंगी। लेकिन समझौते पर अमल यूरोपीय संसद में इसके अनुमोदन के बाद ही होगा। इस अनुमोदन प्रक्रिया में य़ह महीनों तक का समय लग सकता है।
ईयू के अधिकारियों का कहना है कि ये समझौता अमल में आने के बाद यूरोपीय कंपनियों की पहुंच एक अरब 40 करोड़ लोगों के चीनी बाजार में हो जाएगी। इसके तहत वे नई ऊर्जा से संचालित वाहनों, क्लाउड सेवाओं, वित्तीय सेवाओं और हेल्थकेयर के क्षेत्र में कारोबार कर सकेंगी। साथ ही समझौते में जबरन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर रोकने, सब्सिडी के मामले में पारदर्शिता और सरकारी उद्योग प्रतिष्ठानों की संख्या सीमित करने की शर्तें शामिल होंगी।