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‘अवैध हिरासत’ के मुद्दे पर कनाडा और चीन में फिर खिंचीं तलवारें

Tue, 16 Feb 2021 03:14 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ओटावा

सार

कनाडा के दो नागरिक 2018 से चीन में कैद हैं। पूर्व राजनयिक माइकल कोवरिग और व्यापारी माइकल स्पेवॉर को चीन उस समय हिरासत में ले लिया था, जब कनाडा में चीनी कंपनी हुवावे के अधिकारी मेंग वानझाऊ को गिरफ्तार किया गया था...
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कनाड के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
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विस्तार
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कनाडा और चीन के बीच कूटनीतिक तनाव में एक नया मोड़ आ गया है। कनाडा और अमेरिका सहित 56 देशों ने सोमवार को एक दस्तावेज पर दस्तखत किए, जिसमें राजनीतिक मकसद के लिए विदेशी नागरिकों को हिरासत में रखने की कड़ी निंदा की गई है। इस दस्तावेज को ‘मनमाने ढंग से किसी दूसरे देश के नागरिक को हिरासत में रखने के खिलाफ घोषणापत्र’ कहा गया है। इस दस्तावेज को जारी करते हुए कनाडा के विदेश मंत्री मार्क गार्नेउ ने कहा, इस गैर-कानूनी और अनैतिक व्यवहार से सभी देशों के नागरिकों के लिए खतरा पैदा होता है और कानून के शासन के सिद्धांत की अनदेखी होती है। यह अस्वीकार्य है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए।

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गौरतलब है कि कनाडा के दो नागरिक 2018 से चीन में कैद हैं। पूर्व राजनयिक माइकल कोवरिग और व्यापारी माइकल स्पेवॉर को चीन उस समय हिरासत में ले लिया था, जब कनाडा में चीनी कंपनी हुवावे के अधिकारी मेंग वानझाऊ को गिरफ्तार किया गया था। मेंग को प्रत्यार्पित करके अमरिका से कनाडा लाया गया। कनाडा में उन पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। गौरतलब है कि ये कार्रवाई उसी समय हुई, जब अमेरिका ने हुवावे के खिलाफ अपनी अंतरराष्ट्रीय मुहिम शुरू की थी।

चीन ने कोवरिग और स्पेवॉर पर जासूसी के आरोप लगाए हैं। तब चीन ने इस बात का खंडन किया था कि इन दोनों को मेंग की गिरफ्तारी के जवाब में हिरासत में लिया गया। लेकिन ये घटनाक्रम जिस तरह से आगे बढ़ा, उसके बीच इसे जवाबी कार्रवाई ही समझा गया है। मेंग पर अभी भी कनाडा में मुकदमा चल रहा है।
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चीन ने जारी हुए ताजा दस्तावेज पर अपना कड़ा विरोध जताया है। कनाडा स्थित चीनी दूतावास ने मंगलवार को एलान किया कि वह इस बारे में औपचारिक रूप से अपना विरोध दर्ज कराएगा। दूतावास के प्रवक्ता ने कहा- यह सबको मालूम है कि मेंग वानझाउ का मामला पूरी तरह से राजनीतिक है। कनाडा ने मनमाने ढंग से चीन के निर्दोष नागरिक मेंग को कैद कर रखा है, जिन्होंने कनाडा के किसी कानून को नहीं तोड़ा। ऐसा करके कनाडा ने एक चीनी नागरिक के वैध अधिकारों और हितों का घोर उल्लंघन किया है। यह हर नजरिए से मनमाने ढंग से हिरासत में रखने का एक मामला है।

चीन ने कहा है कि एक तरफ कनाडा कानून के शासन की रक्षा करने और मनमानी हिरासत का विरोध करने का दावा करता है, दूसरी तरफ वह अमरिका के पिछलग्गू के रूप में काम करता है। वह चीनी उद्यमों का दमन करने के लिए मेंग का इस्तेमाल करने में अमेरिका की मदद कर रहा है। इसलिए कनाडा का अवैध हिरासत का मामला उठाना उल्टे चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत को सच करता है। चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कनाडा की तरफ से जारी ताजा बयान को पाखंड और निंदनीय बताया है।

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कनाडा के टीवी चैनल की वेबसाइट सीबीसी.सीए पर छपी एक रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि जून 2020 में कनाडा के 19 राजनेताओं, पूर्व नौकरशाहों, शिक्षा शास्त्रियों और सिविल सोसयटी की शख्सियतों ने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को पत्र लिख कर मेंग के बारे में कनाडा सरकार के प्रति अपना रुख बदलने की अपील की थी। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक कनाडा मीडिया में ऐसे कई लेख छपे हैं, जिनमें मेंग को रिहा कर देने के सुझाव दिए गए हैँ।

इस बीच कई विशेषज्ञों ने कहा है कि ताजा बयान से चीन में कैद कनाडा के नागरिकों की रिहाई की संभावना पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उनके मुताबिक कनाडा के नागरिकों को चीन तब तक रिहा नहीं करेगा, जब तक कनाडा मेंग के मामले में वैसा ही कदम नहीं उठाता है।

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