रिपोर्ट में कहा गया, ‘मानव तस्करी को खत्म करने की दिशा में भारत न्यूनतम मानकों पर खरा नहीं उतरा, लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास किए। पहले की तुलना में सरकार ने कई कदम उठाए हैं।' रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में सरकारी मदद प्राप्त एक आश्रय गृह के मामले में आरोपियों के खिलाफ कदम उठाए गए। मामले में राज्य सरकार के तीन अधिकारियों समेत 19 लोगों को दोषी ठहराया गया। एक पूर्व विधायक समेत 12 लोगों को आजीवन कारावास की सजा हुई।
रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार मानव तस्करी रोधी विधेयक पर मसौदा तैयार करने के लिए प्रयास कर रही है। सभी 732 जिलों में पुलिस की मानव तस्करी रोधी इकाई का विस्तार करने के लिए धन प्रदान करने का संकल्प भी जताया गया है। एनआईए को अंतरराज्यीय मानव तस्करी की जांच का अधिकार दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में न्यूनतम मानकों पर खरा नहीं उतर पाई।
सरकार तस्करी की समस्या को खत्म करने के लिए अपने प्रयासों में निरतंरता नहीं रख पाई। खासकर बंधुआ मजदूरी के खिलाफ अभी तक समुचित कदम नहीं उठाए गए हैं। भारत पहले भी मानव तस्करी पर अमेरिकी विदेश विभाग की वार्षिक रिपोर्ट को ‘पूर्वाग्रह वाले और पक्षपातपूर्ण’ बताकर खारिज कर चुका है।