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36 साल में चार गुना बढ़ा बच्चों का मोटापा: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दवा-सर्जरी को लेकर दी चेतावनी; क्या कहा?

एजेंसी, जिनेवा। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 08 Oct 2026 07:11 AM IST

सार

डब्ल्यूएचओ ने नौ साल तक के बच्चों में वजन घटाने वाली दवाओं, सर्जरी और उपकरणों के इस्तेमाल से बचने की सिफारिश की है। दुनिया में बच्चों का मोटापा 36 साल में चार गुना बढ़ चुका है, ऐसे में डब्ल्यूएचओ के नए दिशानिर्देश क्यों अहम हैं? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 
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बच्चों में मोटापा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक


केवल गंभीर मामलों में ही स्वीकृत दवाओं या थेरेपी पर विचार किया जा सकता है। वह भी तब जब डॉक्टर की देखरेख में लाइफस्टाइल प्रोग्राम पूरी तरह से बेअसर रहा हो। बेरियाट्रिक सर्जरी की अनुमति भी बेहद सख्त शर्तों के तहत केवल अत्यधिक मोटापे से ग्रस्त किशोरों को ही दी जाएगी।


खान-पान में सुधार,  शारीरिक गतिविधि हो मोटापे के इलाज का आधार : संगठन का कहना है कि बच्चों के मोटापे का इलाज करने का मुख्य आधार दवाएं नहीं, बल्कि खान-पान में सुधार,  शारीरिक गतिविधि और व्यवहार में बदलाव होना चाहिए। साथ ही माता-पिता या देखभाल करने वालों की सख्त निगरानी में ही डिजिटल ऐप्स या हेल्थ गैजेट्स का उपयोग करने की सलाह दी गई है।


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इसके अलावा मोटापे से ग्रस्त बच्चों में एंग्जायटी, डिप्रेशन, कम आत्मसम्मान और चिढ़ाना (बुलिंग का खतरा अधिक होता है। ऐसे में  स्वास्थ्य कर्मियों को मोटापे के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का इलाज भी शुरुआत में ही और एक साथ करने के निर्देश दिए गए हैं। बच्चों और किशोरों में बढ़ते मोटापे से निपटने के लिए डब्ल्यूएचओ ने पहली बार  वैश्विक दिशानिर्देश जारी किए हैं। 


36 साल में चार गुना बढ़ी मोटापे की समस्या

वैश्विक स्तर पर बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ा है। 2024 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में 5 से 19 वर्ष के लगभग 17 करोड़ बच्चे और किशोर मोटापे से पीड़ित थे। 1990 के बाद से इसी आयु वर्ग में मोटापे की दर चार गुना बढ़ चुकी है। डब्ल्यूएचओ ने सरकारों से ऐसी नीतियां बनाने की भी अपील की है जिससे बच्चों के लिए पौष्टिक आहार और खेलकूद के साधन अधिक सुलभ और सस्ते हो सकें।
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