ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद भी जून में होने वाले इस पद के चुनाव में फिर से किस्मत आजमा रहे हैं। बीते बुधवार को उन्होंने अपने समर्थकों के साथ गृह मंत्रालय में राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए अपना पंजीकरण फॉर्म भरा। अहमदीनेजाद ने हाल के वर्षों में अपनी कट्टरपंथी छवि को अधिक मध्यमार्गी उम्मीदवार के रूप में चमकाने की कोशिश की है तथा कुप्रबंधन के लिए सरकार की आलोचना की है।
उनपर 2017 में सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामनेई ने राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। हालांकि उन्होंने तब नामांकन दायर कर दिया था, मगर संवैधानिक निगरानी संस्था ‘गार्जियन काउंसिल’ ने उन्हें तब अयोग्य ठहरा दिया था। बता दें कि राष्ट्रपति खामनेई ने कहा है कि वह किसी भी उम्मीदवार का विरोध नहीं करेंगे। हालांकि, फिर भी चुनाव परिषद अहमदीनेजाद की उम्मीदवारी रोक सकती है।
खामनेई ने मंगलवार को ईरानी विश्वविद्यालय के छात्रों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा था कि पहले चुनावों में जो उम्मीदवार बनना चाहता था उसने मुझसे पूछा था कि क्या मैं सहमत हूं? उन्होंने कहा, 'इस साल मैंने कहा कि मैं इस बारे में कुछ नहीं कहूंगा।' उल्लेखनीय है कि ईरान अमेरिका के साथ तनाव के बीच परमाणु समझौते को लेकर विश्व शक्तियों के साथ बातचीत कर रहा है।
इस बीच अहमदीनेजाद का प्रवेश चुनाव में जान फूंक सकता है जो कोरोना वायरस और पाबंदियों की वजह से ठंडा पड़ा था। अगर राजनीतिक परिदृश्य में उनकी वापसी होती है तो यह कट्टपंथियों में उन असंतुष्टों के लिए खुशी की बात हो सकती है जो पश्चिम, खासकर इस्राइल और अमेरिका के खिलाफ कड़ा रुख चाहते हैं।