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ईरान में भारत की मदद से चा'बहार', पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था चारों खाने चित्त

Thu, 14 Mar 2019 01:27 PM IST
Priyesh Mishra प्रियेश मिश्र, नई दिल्ली
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चाबहार पोर्ट
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पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को मात देने के लिए भारत द्वारा ईरान के चाबहार को तैयार किए जाने का असर अब साफ दिखने लगा है। इससे न केवल पाक की अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगा है बल्कि पाक ने अपने उत्पादों के लिए बड़े बाजार को भी खो दिया है।
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भारत द्वारा किए गए आर्थिक मदद से तैयार ईरान का चाबहार पोर्ट अब पूरी तरह से काम करने लगा है। इसके निर्माण में 34 करोड़ डॉलर का खर्च आया था। चाबहार का विकास और पुनर्निमाण रेवॉल्यूशनरी गार्ड से संबद्ध कंपनी खातम अलअनबिया ने किया है। हालांकि इसके निर्माण में कई भारतीय सरकारी कंपनियां भी शामिल थीं।

पाक की अर्थव्यवस्था को लगा झटका

पाक को सबसे बड़ा झटका अफगानिस्तान को चाबहार से मिल ने वाली सीधी सप्लाई से पड़ा है। इन दोनों पड़ोसी देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 5 अरब डॉलर का था जो अब घटकर डेढ़ अरब डॉलर से भी कम का रह गया है। विश्लेषकों के अनुसार, इसकी सबसे बड़ी वजह ईरान का चाबहार पोर्ट है। अब कोई भी सामाग्री ईरान के चाबहार से होकर सीधे अफगानिस्तान पहुंच रही है।

इससे पहले अफगानिस्तान व्यापार के लिए पाकिस्तान पर पूरी तरह से निर्भर था। अफगानिस्तान चौतरफा जमीन से घिरा हुआ देश है। इसको किसी भी समुद्र या नदी का सीधा संपर्क नहीं है। अफगानिस्तान के उत्तर में तुर्कमेनिस्तान, उजेबकिस्तान जबकि दक्षिण में पाकिस्तान है। पूर्व में ईरान और पश्चिम में तजकिस्तान है। 
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अफगानिस्तान की पाक से निर्भरता हुई खत्म

चाबहार पोर्ट
ऐसे में अफगानिस्तान को व्यापार के लिए पाकिस्तान या ईरान पर निर्भर रहना पड़ रहा है। आतंक के मुद्दे पर अफगानिस्तान और पाकिस्तान में हालात सामान्य नहीं है। इसके अलावा पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के व्यापार को भी कोई सुरक्षा की गारंटी नहीं होती है। इसके कारण अफगानिस्तान को चाबहार का रूख करना पड़ा है। 

इस कारण पाकिस्तान का अफगानिस्तान के साथ व्यापार 5 अरब डॉलर से घटकर आधे से भी कम रह गया है। इसका बड़ा फायदा भारत को मिला है। चाबहार के कारण भारत को अफगानिस्तान और ईरान में तो सीधी बढ़त मिली ही है बल्कि इससे चीन द्वारा पाक में विकसित किए जा रहे ग्वादर को भी काउंटर करने में मदद मिल रही है।

चाबहार कैसे है भारत के लिए फायदेमंद

चाबहार पोर्ट के कारण भारत अपना माल अफगानिस्तान और ईरान को सीधे भेज पा रहा है। इसके अलावा एक बड़ी बात यह भी है कि चाबहार के कारण भारत अपने माल को रूस, तजकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कजकिस्तान और उजेबकिस्तान भेज पा रहा है। इससे भारत के व्यापार में लगातार वृद्धि हो रही है। हथियारों की खरीद के कारण रूस से बढ़ रहे व्यापार घाटे को भी कम करने में भारत को मदद मिल रही है।

ग्वादर का जवाब है चाबहार

चाबहार पोर्ट
चीन और पाक द्वारा संयुक्त रूप से विकसित हो रहे ग्वादर बंदरगाह के काट के रूप में भी ईरान के चाबहार को देखा जा रहा है। यह भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है कि अमेरिका ने इस बंदरगाह को ईरान पर लगे प्रतिबंधों से मुक्त कर रखा है। भारत ने अफगानिस्तान से ईरान के चाबहार तक सड़क मार्ग का निर्माण भी कराया है। जिससे अफगानिस्तान को समुद्र तक आसानी से पहुंच मिला है।

चीन-पाक आर्थिक गलियारा और ग्वादर का सच

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा के तहत बनाए जा रहे ग्वादर पोर्ट में चीन ने अरबों डॉलर का निवेश कर रखा है। दोनों देशों के बीच हुए समझौते के अनुसार अगले 40 सालों तक चीन की पोर्ट निर्माता कंपनी को इसके राजस्व का 91 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। जबकि, पाकिस्तानी ग्वादर पोर्ट अथॉरिटी को कमाई का सिर्फ 9 प्रतिशत हिस्सा ही मिलेगा। इसके अलावा इस पोर्ट पर चीन को 40 साल का बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर एग्रीमेंट भी हासिल है, यह तकनीकी रूप से लीज से अलग होती है।
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अफगानिस्तान को हमने दिया विश्व बाजार

चाबहार पोर्ट
भारत ने 2002 में चाबहार बंदरगाह के विकास की नींव रखी थी। इसका उद्देश्य ही अफगानिस्तान और मध्य एशिया के देशों तक सीधी पहुंच मुहैया कराना था बल्कि अफगानिस्तान को भी पोर्ट का एक्सेस देकर विश्व के साथ व्यापार करने की सुविधा प्रधान करना था। जिससे अफगानिस्तान का पाकिस्तान से निर्भरता खत्म हुई है। 
 
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