भारत और चिली के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) को लेकर वार्ता हो रही है। भारत में चिली के राजदूत जुआन अंगुलो ने कहा, 2025 के अंत तक इस समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिशें तेज हो गई हैं। राजदूत अंगुलो ने कहा कि दोनों देशों के बीच अब तक तीन दौर की वार्ता पूरी हो चुकी है। नवीनतम दौर 27-30 अक्तूबर को सैंटियागो में हुआ था।
लिथियम पर विशेष रूप से मंथन...
दोनों देशों के बीच इस बातचीत के दौरान वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, निवेश, मूल-देश नियम, बौद्धिक संपदा अधिकार, तकनीकी और स्वास्थ्य मानक, आर्थिक सहयोग और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। राजदूत के मुताबिक वार्ता के दौरान लिथियम पर विशेष रूप से मंथन हुआ।
चिली के पास दुनिया का 38 फीसदी लिथियम
बता दें कि चिली के पास दुनिया का सबसे बड़ा लिथियम भंडार है। करीब 9.3 मिलियन मीट्रिक टन का यह भंडार कुल वैश्विक मात्रा का लगभग 38% है। 2024 में चिली ने 44,000 मीट्रिक टन लिथियम उत्पादन किया था। इसके अलावा चिली के पास सबसे बड़े तांबे (कॉपर) के भंडार, तथा आयोडीन, रीनीयम और मॉलिब्डेनम के भी बड़े संसाधन मौजूद हैं। भारत की बढ़ती ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन जरूरतों को देखते हुए ये खनिज भारत की आपूर्ति सुरक्षा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
राजदूत अंगुलो ने कहा, CEPA के तहत 90% से अधिक वस्तुओं पर शुल्क समाप्त करने का लक्ष्य है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंध गहरे होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'मिनरल्स चैप्टर' समेत सीईपीए के हर अध्याय पर बातचीत की जा रही है। अंतिम निर्णय तक सभी अध्याय खुले रहेंगे। वार्ता का अगला दौर इसी माह यानी नवंबर में ही होने की संभावना है।
गौरतलब है कि चिली में लिथियम उत्पादन मुख्यतः दो कंपनियों- 'SQM' और 'Albemarle' की मदद से किया जाता है। अटाकामा क्षेत्र में होने वाले उत्पादन में नए सार्वजनिक-निजी प्रोजेक्ट्स को स्वीकृति मिली है। इस कारण माना जा रहा है कि 2028 तक लिथियम उत्पादन में 70% तक बढ़ सकता है। भारतीय सरकारी इकाई 'काबिल (KABIL)' भी संयुक्त परियोजनाओं के लिए संभावनाएं तलाश रही है।
राजदूत अंगुलो ने कहा कि चिली भारत में कच्चे माल के साथ-साथ मूल्यवर्धित उत्पादों का निर्यात भी बढ़ाना चाहता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत केवल एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता, इसलिए विविध स्रोतों से लिथियम आपूर्ति भारत की रणनीति का अहम हिस्सा है। इस संदर्भ में भारत में अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो काउसीनो ने कहा, भारत ने अर्जेंटीना के उत्तरी क्षेत्रों में लिथियम से जुड़ा निवेश किया है। ये 'दोनों देशों के लिए सकारात्मक और लाभकारी' है। हालांकि, ये पूरी तरह भारत पर निर्भर है कि वह एकमात्र सप्लायर चाहता है या अन्य श्रोतों से भी लिथियम चाहता है।