प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के प्रतिनिधिमंडल के बीच एक बैठक हुई जिसमें मिशन ने समझौते के बारे में प्रधानमंत्री को सूचित किया। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच कर्ज के ब्योरे को लेकर आम सहमति बनी और प्रधानमंत्री शरीफ ने भी इस सौदे को मंजूरी दी।
नकदी संकट तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को गुरुवार को थोड़ी राहत मिली। पाकिस्तान और आईएमएफ ने कड़ी बातचीत के बाद एक कर्मचारी स्तर के समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के बाद पाकिस्तान की बीमार अर्थव्यवस्था के लिए विस्तारित निधि सुविधा (ईएफएफ) के तहत एक अरब अमेरिकी डालर से अधिक की ऋण राशि दी जाएगी।
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शहबाज शरीफ और आईएमएफ प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई बैठक
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के प्रतिनिधिमंडल के बीच एक बैठक हुई, जिसमें मिशन ने समझौते के बारे में प्रधानमंत्री को सूचित किया। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच कर्ज के ब्योरे को लेकर आम सहमति बनी और प्रधानमंत्री शरीफ ने भी इस सौदे को मंजूरी दी। वित्त मंत्री इशाक डार को इसे मीडिया के माध्यम से जनता के साथ साझा करने का काम सौंपा गया है।
दोनों पक्षों ने पाकिस्तान की बीमार अर्थव्यवस्था के सभी पहलुओं पर चर्चा की और आईएमएफ ने बजट घाटे में अंतर को पाटने के लिए बिजली और गैस की कीमतों में वृद्धि और नए करों को बढ़ाने सहित कठिन परिस्थितियों पर जोर दिया। ऋण योजना के विवरण पर दोनों पक्ष अंततः आम सहमति पर पहुंच गए। नाथन पोर्टर के नेतृत्व में आईएमएफ प्रतिनिधिमंडल ने 31 जनवरी को वित्त मंत्री डार की अध्यक्षता वाली पाकिस्तान की ओर से सरकार की राजकोषीय नीति पर मतभेदों को सुलझाने के लिए बातचीत शुरू की, जिसने बेलआउट पैकेज से एक अरब अमेरिकी डालर से अधिक की रिलीज को रोक दिया था।
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आईएमएफ फंडिंग पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण
बातचीत के पहले चरण में पाकिस्तान की आईएमएफ के साथ तकनीकी चर्चा तीन फरवरी तक चली। इसके बाद नीतिगत वार्ताओं का दूसरा चरण शुरू हुआ, जो 9 फरवरी को संपन्न हुआ। इसमें आर्थिक और वित्तीय नीतियों के एक ज्ञापन को अंतिम रूप देने पर चर्चा की गई। भुगतान संतुलन के संकट से जूझ रही 350 अरब डॉलर की पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए आईएमएफ फंडिंग महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार नौ साल में पहली बार गुरुवार को तीन अरब डॉलर से नीचे चला गया।
पाकिस्तान ने 2019 में इमरान खान की सरकार के दौरान छह अरब अमेरिकी डॉलर ऋण के लिए आईएमएफ कार्यक्रम में प्रवेश किया था, जिसे पिछले साल बढ़ाकर सात अरब अमेरिकी डॉलर कर दिया गया था। कार्यक्रम की नौवीं समीक्षा आईएमएफ अधिकारियों और सरकार के बीच 1.18 अरब अमेरिकी डालर जारी करने के लिए बातचीत के साथ लंबित थी। आईएमएफ के पैसे की उपलब्धता से पाकिस्तान डिफॉल्ट होने से बच जाएगा, लेकिन इससे रोजमर्रा की जरूरत की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी की सुनामी आने की आशंका है।