कनाडा में 28 अप्रैल को आम चुनाव हैं और पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो के बाद 14 मार्च हो हाल ही में प्रधानमंत्री बने मार्क कार्नी मात्र डेढ़ माह में लिबरल पार्टी को जीत के मुहाने पर खड़ा कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़वे बयान और कनाडा विरोधी बातें पीएम कार्नी को जीत में मदद कर रहे हैं।
कनाडा में 28 अप्रैल को आम चुनाव हैं और पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो के बाद 14 मार्च हो हाल ही में प्रधानमंत्री बने मार्क कार्नी मात्र डेढ़ माह में लिबरल पार्टी को जीत के मुहाने पर खड़ा कर दिए हैं। यह पार्टी के लिए नाटकीय बदलाव है, क्योंकि ट्रूडो के समय यह पार्टी जनमत संग्रहों में हार की कगार पर थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़वे बयान और कनाडा विरोधी बातें पीएम कार्नी को जीत में मदद कर रहे हैं।
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ट्रंप द्वारा व्यापार युद्ध छेड़ने और कनाडा को 51वां अमेरिकी राज्य बनाने की धमकियों से कनाडाई लोग नाराज थे। कार्नी ने इसे राष्ट्रवाद की भावना में बदला और 19 अप्रैल को खत्म नैनो सर्वे में पार्टी को 6 अंकों की बढ़त दिलाई। जनवरी में नैनो सर्वे में ही उनकी पार्टी कंजर्वेटिवों से 47% से 20% तक पीछे थी।
कार्नी बेहतर उम्मीदवार
कनाडा में जस्टिन ट्रूडो के वक्त उनकी पार्टी की सरकार की नीतियों के चलते देश में महंगाई और मकान की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं। साथ ही आप्रवासियों की बढ़ती तादाद को लेकर भी कनाडा के लोग ट्रूडो सरकार से नाराज थे। बढ़ते दबाव पर उनके इस्तीफे के बाद मार्क कार्नी नए नेता चुने गए और चुनाव की समयसीमा अक्तूबर तक होने पर भी उन्होंने सत्ता संभालते ही चुनाव में जाने का एलान कर दिया और संसद भंग कर अप्रैल में ही चुनाव कराने का फैसला किया। वह ट्रूडो से बेहतर साबित हो रहे हैं।
सत्ताधारी दल को प्रमुखता
ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, अगर आज चुनाव होते हैं तो लिबरल पार्टी 43% समर्थन के साथ 196 सीटें जीत सकती है। वहीं विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी को 122 सीटें मिल सकती हैं। एनडीपी को सिर्फ पांच और ब्लॉक क्युबेकोइस पार्टी को 19 सीटें मिल सकती हैं।
कमजोर पड़े पोइलिवरे..
कुछ माह पहले तक, विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी के पियरे पोइलिवरे अगले पीएम के दावेदार बन रहे थे। उन्होंने ट्रंप के 'अमेरिका फर्स्ट' के नारे की तरह 'कनाडा फर्स्ट' का नारा भी दिया, लेकिन अब वह कमजोर पड़ते दिख रहे हैं।