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कनाडा: शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर भारत को 'ज्ञान' देने वाले ट्रूडो का दूसरा चेहरा, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस से बरसवा रहे लाठियां-केमिकल

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ओटावा Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sun, 20 Feb 2022 04:34 PM IST

सार

कनाडा की मीडिया की तरफ से अब तक जो तस्वीरें सामने आई हैं, उनमें पुलिसकर्मियों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर मिर्ची स्प्रे डालते भी देखा गया। इसके अलावा पुरुषों और महिलाओं सभी पुलिस की बर्बरता का शिकार होते देखे गए।
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कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो। - फोटो : अमर उजाला/हिमांशु भट्ट


कनाडा की मीडिया की तरफ से अब तक जो फोटोज सामने आई हैं, उनमें पुलिसकर्मियों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर मिर्ची स्प्रे डालते भी देखा गया। इसके अलावा पुरुषों और महिलाओं सभी पुलिस की बर्बरता का शिकार होते देखे गए। न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, पुलिसकर्मियों की कार्रवाई इतनी भीषण रही है कि ट्रकवालों का प्रदर्शन खत्म होने में अब कुछ ही दिन रह गए हैं। 


पुलिसवालों की कार्रवाई से उग्र हुआ प्रदर्शन

कनाडा की राजधानी ओटावा में संसद भवन को जाम कर के बैठे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की बर्बर कार्रवाई का जवाब देने की भी कोशिश की। यहां कुछ लोगों ने पुलिस पर तेल के कनस्तर और स्मोक ग्रेनेड (धुआं फैलाने वाले ग्रेनेड) फेंके। हालांकि, पहले से ही दंगा रोकने के लिए तैयार पुलिस पूरी तैयारी के साथ आई थी और लाठीचार्ज के जरिए अधिकतर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया गया। 


पुलिस ने इमारतों पर बिठाए स्नाइपर?

पुलिस ने प्रदर्शनों को पूरी तरह कुचलने के लिए पूरी तैयारी भी की। संसद के सामने से प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए वेलिंगटन स्ट्रीट की इमारतों पर स्नाइपर्स बिठा दिए गए। इसके अलावा पुलिस ने अपने वाहनों से सड़कों को भी घेर लिया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने एक के बाद एक प्रदर्शनकारियों के ट्रकों के शीशे तोड़े और उनके टेंट्स को उखाड़ दिया। 

भारत में किसान आंदोलन पर दिया था ये बयान


दिसंबर 2020 में,कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत के आंदोलनकारी किसानों का समर्थन किया था और कहा था कि उनका देश शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा के लिए हमेशा आगे रहेगा। इस बयान से दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध तनावपूर्ण हो गए थे। भारत ने तब भारतीय किसानों को समर्थन देने वाली टिप्पणियों के लिए ट्रूडो पर निशाना साधा था और इन्हें अनुचित करार देते हुए कहा था यह भारत का आंतरिक मामला है।

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