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कोरोना वायरस के कहर के बावजूद क्यों नहीं टल सकता अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव?

Wed, 29 Apr 2020 06:42 PM IST
अंशुल तलमले वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : PTI
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दुनिया का सबसे ताकतवर देश अमेरिका और उस पर राज करने वाला व्यक्ति समूचे विश्व का सर्वाधिक ताकतवर शख्स माना जाता है। भारत की तरह ही अमेरिका भी एक लोकतांत्रिक देश है ऐसे में 3 नवंबर को होने वाली मतगणना बेहद अहम होगी।

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फिलहाल पूरी दुनिया कोरोना वायरस की मार झेल रही है। इस अनजान बीमारी से मरने वालों की तादाद भी अमेरिका में ही अधिक है। ऐसे में कयास तो ये भी लगाए जा रहे थे कि इस बार राष्ट्रपति चुनाव को आगे बढ़ाया जाएगा, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे सिरे से नकार दिया। उनका मानना है कि वोटिंग तो उसी तारीख को होगी।

बीते दिनों वाइट हाउस में संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'मैंने चुनाव की तारीख बदलने के बारे में कभी सोचा भी नहीं था। मैं ऐसा क्यों करूंगा? 3 नवंबर। यह एक अच्छी तारीख है और मैं चुनाव का इंतजार कर रहा हूं।'
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डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से जो बिडेन वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने होंगे। अमेरिका में चल रहे प्राइमरी चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी के बिडेन और बर्नी सैंडर्स के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा था, लेकिन बीते दिनों सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने खुद को राष्ट्रपति की दौड़ से बाहर कर दिया था।

ट्रंप चाहकर भी नहीं बदल सकते तारीख

  • संविधान के अनुसार राष्ट्रपति चुनाव की तारीख बदलने की शक्ति अमेरिकी कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति की अध्यक्षता वाली कार्यकारी शाखा के पास। कांग्रेस कानून बदलकर राष्ट्रपति को समय, जगह का निर्धारण करने के लिए अपने अधिकार सौंप सकती है, लेकिन अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव्स दोनों को इसे मंजूर करना होगा।
     
  • ट्रंप और रिपब्लिकन सीनेट में सत्ता रखते हैं, लेकिन हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव्स डेमोक्रेट द्वारा नियंत्रित किया जाता है, और हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी ट्रंप की कट्टर विरोधी हैं, इसलिए व्यवहारिक रूप से चुनाव की तारीखों का आगे बढ़ना असंभव है।
     
  • अगर ट्रंप और कांग्रेस चुनाव की तारीखों को स्थगित भी कर दिया तो वे ऐसा अनिश्चितकाल के लिए नहीं कर पाएंगे। संविधान का 20वें संशोधन स्पष्ट तौर से बताता है कि राष्ट्रपति चुनाव की आखिर तारीख 20 जनवरी होगी।
     
  • अगले कार्यकाल की शुरुआत की तारीख को बदलने के लिए भी संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होगी, एक प्रक्रिया जो केवल दो-तिहाई सदन और सीनेट के प्रस्ताव से शुरू होती है या एक संवैधानिक सम्मेलन जिसे दो तिहाई राज्य विधानसभाओं द्वारा पास किया जाएगा, इसके बाद ही एक नए संशोधन को अनुमोदित करने की आवश्यकता होगी।
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ट्रंप पर क्या होगा कोरोना इफेक्ट?

  • विशेषज्ञों की माने तो अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव इस बात की तस्दीक कर देंगे कि कोरोना महामारी से निपटने में डोनाल्ड ट्रंप कितने प्रभावी रहे। अगर लोग उनकी नीतियों और फैसलों से खुश होंगे, तो भारी मात्रा में वोट मिल सकते हैं।
     
  • कोरोना की वजह से सर्वाधिक मौत महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका में ही हुई। बावजूद इसके ट्रंप ने लॉकडाउन का एलान नहीं किया। आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह शुरू है, ऐसे में उनकी आलोचना भी हो रही है। यह ट्रंप के खिलाफ जा सकता है।
     
  • बता दें कि अमेरिका में बेकाबू हो चुके हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे। यहां 10 लाख से ज्यादा लोग इस वायरस की चपेट में हैं, जबकि मरने वालों का आंकड़ा 60 हजार पार कर चुका है।
     
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