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South Korea: प्लास्टिक प्रदूषण संधि पर सहमत होने में 175 देश विफल, अगले साल दोबारा गठित होगी समिति

Sun, 01 Dec 2024 11:50 PM IST
दीपक कुमार शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बुसान

सार

सप्ताह भर चली बातचीत में प्लास्टिक उत्पादन और हानिकारक रसायनों पर रोक लगाने की मांग करने वाले और केवल प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने वाले देशों के बीच गहरे मतभेद दिखाई दिए। 
 
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प्लास्टिक प्रदूषण (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला/एजेंसी
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विस्तार
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प्लास्टिक प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि पर सहमति बनाने के लिए दक्षिण कोरिया के बुसान में हुई वैश्विक बैठक रविवार को बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई, क्योंकि 175 देशों के प्रतिनिधि प्लास्टिक उत्पादन और वित्त पर रोक लगाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने में विफल रहे। 

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यह अंतर सरकारी वार्ता समिति (आईएनसी) की पांचवी बैठक थी, जो 2022 से प्लास्टिक प्रदूषण पर एक कानूनी संधि तैयार करने का काम कर रही है। 

सप्ताह भर चली बातचीत में प्लास्टिक उत्पादन और हानिकारक रसायनों पर रोक लगाने की मांग करने वाले और केवल प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने वाले देशों के बीच गहरे मतभेद दिखाई दिए। सभी देशों के प्रतिनिधियों ने प्रमुख मुद्दों पर मतभेदों को पाटने के लिए शनिवार को बंद कमरे में चर्चा की, लेकिन रविवार को जारी किए गए मसौदे ने अधिकांश चिंताओं को अनसुलझा छोड़ दिया। अब सभी देश वार्ता जारी रखने के लिए अगले साल फिर से मिलने पर सहमत हुए हैं। 

संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय संधि पर इस वार्ता के अध्यक्ष लुइस वायस वाल्दिविसो ने प्रतिनिधियों से कहा, 'हमने जो प्रगति की है, हमें उसे आगे बढ़ाना चाहिए। हमारी बातचीत को समाप्त करने के लिए बाद की तारीख में वर्तमान सत्र को फिर से शुरू करने पर एक सामान्य सहमति है।'
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प्लास्टिक उत्पादन कम करना जरूरी
इससे पहले, ग्रीनपीस के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जी. फोर्ब्स ने कहा था कि प्लास्टिक उत्पादन को कम करना संधि का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। प्लास्टिक निर्माता संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाली अंतरराष्ट्रीय रासायनिक संघ परिषद के प्रवक्ता ने स्टीवर्ट हैरिस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए इन कोशिशों का समर्थन किया, लेकिन वह उत्पादन की सीमा तय करने के बजाय प्लास्टिक अपशिष्ट को कम करने और पुनर्चक्रण पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। दूसरी तरफ, सऊदी अरब जैसे पेट्रोकेमिकल उत्पादक देश प्लास्टिक उत्पादन पर सीमा लगाने का विरोध करते रहे हैं।

भारत : प्लास्टिक के विकल्पों का समर्थन, लेकिन इन उत्पादों को बढ़ाव नहीं
वहीं, सिंगल यूज वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने और टिकाऊ विकल्पों को अपनाने का आह्वान करने वाले भारत ने कहा था कि वह प्लास्टिक के विकल्पों और तकनीकों के शोध व विकास का समर्थन करता है, लेकिन इन उत्पादों या तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा नहीं देना चाहता। भारत ने आईएनसी-5 के अध्यक्ष वाल्डिविसो के प्लास्टिक उत्पादों में हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल कम करने के सुझाव का भी विरोध किया। भारत ने तर्क दिया कि प्लास्टिक प्रदूषण संबंधी अंतिम समझौते में अन्य अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

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