एक ब्रिटिश बहुराष्ट्रीय डाक सेवा और कूरियर कंपनी रॉयल मेल में काम करने वाली महिला कर्मचारी को कंपनी की तरफ से लगभग 24 करोड़ का मुआवजा मिला है। महिला का नाम काम झूटी है, जिसको बोनस से संबंधित संभावित धोखाधड़ी का खुलासा करने के लिए उसके बॉस माइक विडमर द्वारा धमकाया गया था। झूटी पहले रॉयल मेल में काम करती थी।
एक रिपोर्ट मे अनुसार, एक ट्रिब्यूनल में उसने बॉस के खिलाफ मामला दर्ज कराया था, अपनी शिकायत में उसने बताया कि एक सहकर्मी ने अवैध तरीके से उनका बोनस हासिल कर लिया तो यह बात बॉस को बताई लेकिन बॉस ने इस पर कोई कार्रवाई करने के बजाय उनको डराया और परेशान किया।
लगभग आठ वर्षों तक चली लंबी अदालती लड़ाई में, एक कोर्ट ने 2019 में फैसला सुनाया कि कंपनी ने झूटी को गलत तरीके से बर्खास्त कर दिया था, और जिसके कारण वह पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर और गंभीर अवसाद से पीड़ित हो गई। एक न्यायाधीश ने कंपनी पर झूटी के जीवन को बर्बाद करने का आरोप लगाया था। वहीं ट्रिब्यूनल ने निष्कर्ष निकाला कि डाक सेवा ने जिस तरह से मामले को देखा वह अत्याचारी, दुर्भावनापूर्ण, अपमानजनक और दमनकारी था।
वहीं, पैनल ने काम झूटी को दो 2 मिलियन पाउंड (लगभग 24 करोड़ भारतीय रुपये) का हर्जाना दिया है, जो रॉयल मेल द्वारा अब तक का सबसे अधिक भुगतान है। हालांक कंपनी ने अभी पूरा भुगतान नहीं किया है क्योंकि डाक सेवा ट्रिब्यूनल के निष्कर्षों के खिलाफ अपील करने की योजना बना रही है।
ये है पूरा मामला
2019 की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में बताया गया कि काम झूटी ने सितंबर 2013 में लंदन स्थित रॉयल मेल की मार्केटरीच इकाई में 50,000 पाउंड प्रति वर्ष के मीडिया विशेषज्ञ के रूप में काम शुरू किया था। हालाँकि, अगले महीने, एक सहकर्मी पर संदेह होने लगा कि वे ऑफकॉम के दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं और टेलर-मेड इंसेंटिव्स (टीएमआई) के रूप में आने वाले बोनस के संबंध में कंपनी की नीति का भी उल्लंघन कर रहे हैं।
इसके बाद झूटी ने अपने बॉस विडमर को मेल के जरिए अपनी चिंताओं के बारे में बताया। इसके बाद उन्होंने काम झूटी के साथ चार घंटे की बैठक की जिसमें उन्होंने कहा कि यदि आरोप झूठे निकले तो इसका उनकी नौकरी पर प्रभाव पड़ेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि टीएमआई नीति के बारे में उनकी समझ काफी कम है। इसके बाद बॉस ने उनको चुप रहने के लिए धमकाया।