जिब्राल्टर में ब्रिटिश नौसेना ने जिस ईरानी जहाज को बंधक बनाया उसने ईरान के अमेरिका के साथ चल रहे तनाव को यूरोपीय देशों की तरफ मोड़ने में अहम भूमिका निभाई। जहाज को बंधक बनाते वक्त उस पर सवार लोगों के साथ कितना बर्बर व्यवहार किया गया इसकी जानकारी ईरानी जहाज के भारतीय कप्तान ने पहली बार मीडिया के सामने दी है।
अपना नाम उजागर न करने की शर्त पर भारतीय कप्तान ने बताया कि हेलिकॉप्टर से जहाज पर उतरने के बाद ब्रिटिश अधिकारियों ने डराने का काम किया। उन्होंने कहा कि बंदूक का भय दिखाकर उनके निहत्थे चालक दल के सदस्यों को जहाज के डेक पर घुटनों के बल बैठाए रखा। भारतीय कप्तान ने कहा कि उसने खुद को जहाज का कप्तान बताया, लेकिन ब्रिटिश नौसेना के अधिकारियों ने इस पर ध्यान देने के बजाय उन पर बंदूकें तान दीं और उन पर चिल्लाते हुए कहा, आगे देखो, आगे देखो... इस कार्रवाई के दौरान कोई नियम नहीं था, हम 28 निहत्थे चालक दल के सदस्य थे। हम सभी बुरी तरह स्तब्ध थे। ईरानी जहाज के दोनों मुख्य अधिकारी भारतीय थे, जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में दोनों को सशर्त जमानत दे दी गई।
ईयू प्रतिबंधों के उल्लंघन का था शक
बता दें कि चार जुलाई को ब्रिटिश शाही नौसेना ने जिब्रास्टर के अधिकारियों की मदद से ईरानी जहाज ग्रेस-1 टैंकर को बंधक बना लिया था। ब्रिटिश नौसेना को शक था कि ईरानी जहाज यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का उल्लंघन करके दो लाख बैरल से ज्यादा कच्चा तेल सीरिया ले जा रहा है।
ईरान-अमेरिकी तनाव पर मैक्रों-रूहानी में बातचीत
वहीं, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने ईरानी समकक्ष हसन रूहानी से वार्ता कर ईरान-अमेरिकी तनाव कम करने की फिर से अपील की। फ्रांस के राष्ट्रपति भवन ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करना हमारी जिम्मेदारी है कि सभी पक्ष वार्ता शुरू करने के लिए सहमत हों। क्योंकि 2015 के एटमी समझौते में ब्रिटेन और जर्मनी के साथ फ्रांस ने भी अहम भूमिका निभाई थी।