कई वर्षों तक चली लंबी बहस के बाद अंतत: ब्रिटिश संसद ने यूरोपीय संघ (ईयू) से ब्रिटेन के अलग होने वाले ब्रेग्जिट विधेयक को मंजूरी दे दी। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने गुरुवार को संसद से पारित किए गए ऐतिहासिक विड्रॉल एग्रीमेंट बिल को कानूनी तौर पर मंजूरी देने की औपचारिकता पूरी कर दी। इसके साथ ही जनवरी के अंत में ब्रिटेन का यूरोपीय संघ (ईयू) से अलग होना तय हो गया है। यह कानून 31 जनवरी को ब्रिटिश सरकार को ईयू से बाहर निकलने का कानूनी हक देता है।
संसद में ब्रेग्जिट विधेयक को मंजूरी ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन के लिए राहत भरा फैसला है। कंजर्वेटिव पार्टी के नेता जॉनसन ब्रेग्जिट के प्रबल समर्थक रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि चाहे कुछ भी हो जाए ब्रिटेन 31 अक्टूबर तक बिना समझौते के ईयू से बाहर निकल जाएगा। यहां तक कि जॉनसन ने कहा था कि वह इसके परिणामों के लिए तैयार हैं।
ब्रिटेन साल 1973 में 28 सदस्यीय यूरोपीय यूनियन का सदस्य बना था। ब्रेग्जिट के साथ ब्रिटेन की करीब पांच दशक पुरानी सदस्यता खत्म हो जाएगी। ऐसा करने वाला ब्रिटेन पहला देश होगा। हालांकि, ईयू के नियमों के तहत 31 दिसंबर तक वह कारोबार करेगा।
ब्रेग्जिट का मतलब है 'ब्रिटेन एग्जिट' यानी ब्रिटेन का यूरोपीय यूनियन से बाहर निकलना। साल 2016 में ब्रिटेन में ब्रेग्जिट को लेकर जनमत संग्रह किया गया था। इसमें 50 फीसदी से ज्यादा लोगों का मानना था कि ब्रिटेन को यूरोपीय यूनियन से बाहर निकलना चाहिए। बीते साल ब्रिटेन में हुए आम चुनाव में सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी ने जबरदस्त जीत हासिल की थी। बोरिस जॉनसन की कंजरवेटिव पार्टी को 650 सीटों वाली संसद में 364 सीटें मिली थीं। चुनाव परिणाम के साथ ही ब्रेग्जिट का रास्ता साफ हो गया था। इस चुनाव में एक दर्जन से अधिक भारतवंशी उम्मीदवारों ने भी जीत का परचम लहराया था।
1980 के दशक में मार्गरेट थैचर के दौर के बाद कंजरवेटिव पार्टी की यह सबसे बड़ी जीत रही थी। नतीजों का एलान होने के बाद प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने दो-टूक कहा था कि हम यूरोपीय संघ (ईयू) से ब्रिटेन को अलग करने वाले ब्रेग्जिट को 31 जनवरी तक हर हाल में पारित कराएंगे।