सात हफ्ते पहले राजनीतिक विश्लेषकों ने ऋषि सुनक की राजनीतिक श्रद्धांजलि लिख दी थी। ऐसा माना जा रहा था कि सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी के नेता पद के चुनाव में लिज ट्रस से हारने के बाद उनकी सियासी कहानी खत्म हो गई थी। लेकिन घटनाक्रम ने नाटकीय मोड़ लिया और अब सुनक प्रधानमंत्री बन गए हैं। अब विशेषज्ञों ने कहा है कि ये पूरा प्रकरण इस बात का संकेत है कि ब्रिटेन की राजनीति किस हद तक अनिश्चित हो गई है। राजनीति के इसी मौजूदा रूप को अब सुनके लिए एक चेतावनी माना जा रहा है।
यहां मीडिया टिप्पणियों में ये आम राय जताई गई है कि इस बार जिस आसानी से सुनक को प्रधानमंत्री पद मिल गया है, उनके लिए राज करना उतना आसान नहीं होगा। इसकी पहली झलक सोमवार को ही मिल गई, जिस रोज पेनी मॉर्डंट के नेता पद की होड़ से हटने के बाद सुनक को विजेता घोषित किया गया। सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के समर्थक सांसद क्रिस्टोफर चोप ने बीबीसी रेडियो-4 को दिए एक इंटरव्यू में दो टूक कहा कि सुनक ने जॉनसन और ट्रस का साथ नहीं निभाया, इसलिए अब उन्हें उन नेताओं के समर्थकों से साथ पाने की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।
चोप ने कहा- ‘हमारी ससंदीय पार्टी गुटों में बंटी हुई है और इसके बीच शासन करना नामुमकिन-सा हो गया है। यही वजह है कि बोरिस जॉनसन नेता पद की होड़ से हट गए। साफ है कि ऋषि सुनक उन्हें अपना समर्थन देने को तैयार नहीं थे। अब जब तक कोई ऐसा नेता सामने नहीं आता, जिसे संसदीय पार्टी का सम्मान और समर्थन हासिल हो, व्यावहारिक रूप से शासन करना संभव नहीं होगा।’
कंजरवेटिव पार्टी के एक धड़े, विपक्षी लेबर पार्टी और मीडिया के एक बड़े हिस्से ने यह सवाल उठाया है कि आखिर सुनक किसके वोट से चुने गए हैं। मंगलवार को अखबार द मिरर अपनी पहली हेडलाइन बनाई- हू वोटेड फॉर यू? (आपको किसने चुना है)। ऐसी टिप्पणियों में कहा गया है कि मतदाताओं का जनादेश तो दूर, कंजरवेटिव पार्टी के सदस्यों के भी बिना मतदान किए 42 वर्षीय सुनक को नेता घोषित कर दिया गया है।
भारतीय मूल के सुनक के माता-पिता पूर्वी अफ्रीका से 1960 के दशक में ब्रिटेन आए थे। उनके पिता डॉक्टर थे, जबकि मां दवा की दुकान चलाती थीं। वे हिंदू धर्म को मानते हैं और जब जॉनसन सरकार में वे मंत्री बने, तो भगवद्गीता के नाम पर शपथ ली थी। उनकी पढ़ाई ऑक्सफॉर्ड के विनस्टर कॉलेज में हुई, जहां सबसे धनी लोगों के बच्चे पढ़ते हैं। पढाई पूरी करने के बाद उन्होंने गोल्डमैन शैक्स सहित कई बैंकों और हेज फंड्स में काम किया। अब ये पहलू ही उनकी आलोचना का विषय बन गए हैं। विपक्षी लेबर पार्टी ने उनकी धनी पृष्ठभूमि को लेकर निशाना साधा है। कई टीकाकारों ने उन्हें बैंकरों का प्रतिनिधि बताया है।
लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ये बातें सुनक के लिए चिंता का पहलू नहीं हैं। उनकी सबसे बड़ी चिंता कंजरवेटिव पार्टी के अंदर से आएगी। बोरिस जॉनसन और उनके समर्थकों में ये गहरी शिकायत है कि जॉनसन सरकार से अचानक इस्तीफा देकर सुनक ने तत्कालीन प्रधानमंत्री के साथ विश्वासघात किया था। सुनक के ही इस्तीफे से जॉनसन सरकार के गिरने की शुरुआत हुई थी। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि अब जॉनसन गुट सुनक से बदला लेने की तैयारी में है।