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एक और संकट: मंदी की ओर बढ़ रहा है ब्रिटेन, ढाई लाख परिवार दरिद्र होने के कगार पर

Fri, 13 May 2022 10:11 PM IST
गौरव पाण्डेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, लंदन

सार

ब्रिटेन के सबसे पुराने स्वतंत्र अनुसंधान संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इकॉनमिक एंड सोशल रिसर्च (एनआईईएसआर) ने मांग की है कि दरिद्रता के कगार पर पहुंचे परिवारों की मदद के लिए सरकार तुरंत राहत पैकेज की घोषणा करे।
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British PM Boris Johnson - फोटो : PTI (File)
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विस्तार
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रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की ब्रिटेन को बहुत महंगी कीमत चुकानी पड़ रही है। देश की अर्थव्यवस्था स्टैगफ्लेशन (मुद्रास्फीतिजनित मंदी) के कगार पर है। यह अनुमान लगाया गया है कि इस साल ढाई लाख और परिवार दरिद्रता के शिकार हो जाएंगे। इस तरह देश में दरिद्र परिवारों की संख्या 12 लाख तक पहुंच जाएगी। 
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ब्रिटेन के सबसे पुराने स्वतंत्र अनुसंधान संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इकॉनमिक एंड सोशल रिसर्च (एनआईईएसआर) ने मांग की है कि दरिद्रता के कगार पर पहुंचे परिवारों की मदद के लिए सरकार तुरंत राहत पैकेज की घोषणा करे।

एनआईईएसआर ने ही इस हफ्ते यह अनुमान लगाया कि ब्रिटिश अर्थव्यवस्था स्टैगफ्लेशन का शिकार होने जा रही है। स्टैगफ्लेशन उस अवस्था को कहते हैं, जब मुद्रास्फीति की दर जीडीपी वृद्धि दर से दो तिमाही तक ऊंची बनी रहती है। ब्रिटिश मीडिया में छपी रिपोर्टों के मुताबिक ब्रिटेन के सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ इंग्लैंड भी ऐसी आशंका से चिंतित है। बल्कि बैंक से जुड़े अधिकारियों ने ये अंदेशा भी जताया है कि ब्रिटेन आने वाले महीनों में मंदी का शिकार हो सकता है।
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स्टैगफ्लेशन में फंसने के बाद उससे बाहर निकलना बड़ी चुनौती
विश्लेषकों ने कहा है कि स्टैगफ्लेशन में फंस जाने के बाद किसी अर्थव्यवस्था के लिए उससे बाहर आना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। इस बीच ब्रिटेन में महंगाई, खासकर ईंधन के महंगा होने का आम जीवन पर खराब असर साफ नजर आने लगा है। एनआईईएसआर ने कहा है कि 2016 में ब्रेग्जिट जनमत संग्रह के बाद से ही सरकारों ने कल्याण योजनाओं पर खर्च घटाना शुरू कर दिया था। इससे गरीब तबकों की स्थिति बिगड़ी। अब यूक्रेन युद्ध के कारण बढ़ी महंगाई ने उनकी जिंदगी और मुहाल कर दी है।
 
इस संस्था ने भविष्यवाणी की है कि इस साल मुद्रास्फीति दर औसतन 7.8 फीसदी रहेगी। अगली सर्दियों में यह 8.5 फीसदी तक जा सकती है। जबकि बैंक ऑफ इंग्लैंड ने मुद्रास्फीति दर 10 फीसदी तक जाने की चेतावनी दी है। अनुमान है कि अगले वर्ष महंगाई से राहत मिलेगी। लेकिन इस बीच गरीब परिवारों की अगर सरकार ने मदद नहीं की तो उनकी स्थिति बदतर होती चली जाएगी। 

2022 की दूसरी छमाही में मंदी का शिकार हो जाएगी अर्थव्यवस्था
एनआईईएसआर ने कहा है कि सरकार ने पांच पाउंड की ईंधन सब्सिडी का जो एलान किया है, उससे सिर्फ बेहतर स्थिति वाले वाहन ड्राइवरों को मदद मिल रही है। घरेलू ईंधन के इस्तेमाल में इससे ज्यादा सहायता नहीं मिली है। इस संस्था ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि निम्न आर्थिक विकास दर और बेरोजगारी में इजाफे के कारण 2022 की दूसरी छमाही में ब्रिटिश अर्थव्यवस्था मंदी का शिकार हो जाएगी। एनआईईएसआर के प्रमुख जगजीत चड्ढा ने कहा कि इस हाल के लिए पूरी तरह सरकारी नीतियां जिम्मेदार हैं। 

अखबार द गार्जियन के मुताबिक इस संस्था के उप-निदेशक प्रोफेसर एड्रियन पैब्स्त ने कहा, ‘महंगाई के कारण लोगों के बिल चुकाने का खर्च बढ़ेगा। उससे बाजार में मांग घटेगी। इसका नतीजा आमदनी की गैर बराबरी बढ़ने के रूप में सामने आएगा। महंगाई के कारण निम्न आय वाले परिवारों के बजट पर सबसे ज्यादा मार पड़ेगी। इससे ढाई लाख परिवार कर्ज के बोझ से दब कर दरिद्रता का शिकार हो जाएंगे। इन परिवार की मदद के लिए सरकार को हर हफ्ते 25 पाउंड की प्रत्यक्ष सहायता का एलान करना चाहिए।’
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