कोरोना महामारी के कारण दुनियाभर के देशों को आर्थिक तौर पर भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। ब्रिटेन भी इससे अछूता नहीं है। इस बीच ब्रिटेन के नियोक्ताओं पर आरोप लगा है कि वे आर्थिक क्षति से उबरने के लिए विवादास्पद उपाय फायर एंड री-हायर की नीति अपना रहे हैं। बता दें फायर एंड री-हायर एक ऐसी नीती है जिसमें पहले तो कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया जाता है और फिर नियोक्ता अपनी मनमानी शर्तों पर उन्हें वापस से नौकरी पर रख लेता है।
नियोक्ता कर्मचारियों से मनमानी शर्तों पर करा रहे काम
इस स्कीम के कारण जो कर्मचारी आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं या फिर उनके पास नौकरी के लिए दूसरा कोई विकल्प नहीं होता है, उन्हें नियोक्ता की मनमानी शर्तों या फिर पहले से कम वेतन पर काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। पिछले माह अप्रैल में जब ब्रिटिश गैस के कर्मचारियों ने नए अनुबंधों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया तब कंपनी ने अपने करीब 500 इंजीनियरों को बर्खास्त कर दिया था।
आलोचनाओं का सामना कर रहीं कई कंपनियां
वहीं, पिछले साल ब्रिटिश एयरवेज के कर्मचारियों का भी प्रस्तावित फायर एंड री-हायर नीति को लेकर राष्ट्रीय एयरलाइन के प्रबंधन के साथ विवाद हुआ था। इसके अलावा साल 2019 में सुपर मार्केट की दिग्गज कंपनी एस्डा को भी इस नीति के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।
नीति पर प्रतिबंध लगाने की मांग
ब्रिटेन में फायर एंड री-हायर की अनुमति है लेकिन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इसे अस्वीकार्य करार दिया है। यहां के कुछ ट्रेड यूनियन और मुख्य विपक्षी लेबर पार्टी इस नीति पर प्रतिबंध की मांग कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि फायर एंड री-हायर नीति कार्यस्थल पर एक बीमारी बनती जा रही है।
ट्रेड यूनियन कांग्रेस के छात्र समूह ने 2,231 श्रमिकों पर सर्वेक्षण किया, जिसमें उन्होंने पाया कि इस नीति के कारण 10 में से एक श्रमिक को बदतर परिस्थितियों या फिर बर्खास्तगी का सामना करना पड़ रहा है।