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ब्रिटेन: कर्मचारी जॉब न छोड़ें इसलिए उन्हें अपनी सैलरी खुद तय करने दे रहीं कंपनियां

Sat, 14 Sep 2019 10:07 AM IST
Trainee Trainee वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

  • युवा और स्किल्ड कर्मचारियों को कंपनी में बनाए रखने के लिए अपनाए जा रहे हैं नए तरीके
  • ब्रिटेन की कंपनियां अपने कर्मचारियों को खुद ही सैलरी तय करने दे रही है
  • रिसर्च के मुताबिक ब्रिटेन में 84% युवा करियर के पहले दो साल में नौकरी बदल लेते हैं
     
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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अच्छे कर्मचारी जल्दी नौकरी छोड़ कर न जाए इसके लिए विदेशों में कंपनियां तरह-तरह के तरीके ईजाद कर रही है। ब्रिटेन और यूरोप की कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों को अपनी सैलरी खुद ही तय करने दे रही है।

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वही, कुछ कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को खुश रखने के लिए उन्हें फ्री सिनेमा टिकट, जिम के पास जैसी तमाम सुविधाएं देती है। एक रिसर्च के मुताबिक 84% युवा अपने शुरुआती दो साल में ही नौकरी बदल लेते हैं। इसे रोकने के लिए कंपनियां अपनी सैलरी खुद तय करने का सुझाव लेकर आई हैं। 

ब्रिटेन की ग्रान्टट्री कंपनी में 45 कर्मचारी हैं। इस कंपनी ने अपने कर्मचारियों से अपना पूरा बजट शेयर किया है। जिसके बाद सभी कर्मचारियों ने अपने काम का मूल्यांकन कर खुद ही कर अपनी सैलरी तय की।
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ब्रिटेन के ह्यूमन रिसोर्स प्रोफेशनल्स ऑर्गनाइजेशन ने कहा कि इससे सैलरी में पारदर्शिता आएगी। लेकिन उन्होंने बताया कि इसे काफी सावधानी के साथ लागू करना होगा। अगर इसको सही प्रकार से लागू नहीं किया गया तो इसका प्रभाव उल्टा भी पड़ सकता है। 

ब्रिटेन के पॉड ग्रुप ने कहा कि कभी-कभी कर्मचारी मार्केट रेट से ज्यादा पैसा मांग लेते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि वे लालची हैं। बल्कि यह उनकी समझ की कमी की वजह से हैं। एक बार एक जूनियर कर्मचारी ने सैलरी में 50% की वृद्दि मांग की। 

तब साथ काम करने वाले लोगों ने उसे समझाया कि तुम इतनी सैलरी अपने काम के हिसाब से सही साबित नहीं कर पाओगे। लिहाजा इसके चलते भविष्य में तुम्हें अपनी नौकरी से हाथ थोना पड़ सकता है। स्मार्केट कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर टॉम हार्डमैन ने बताया कि फिलहाल सैलरी का खुद निर्णय करने वाली नीति ज्यादातर टेक कंपनियों में है। 

उन्होंने आगे बताया कि अगर यह तरीक सफल होता है तो परंपरागत वर्कप्लेस पर भी यह तेजी से लागू होगा। इससे कर्मचारी अपनी सैलरी पर चर्चा न करने वाली मानसिकता से भी बाहर आते हैं। 

एआई के जरिए भत्ते और सुविधाओं का किया जा रहा है मूल्याकंन

कंपनियां कर्मचारियों को दिए जाने वाले भत्ते और सुविधाओं का भी मूल्यांकन कर रही हैं। इसके लिए वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ डेटा एनालिटिक्स और चैटबॉट का प्रयोग कर रही हैं। 

कंपनियां डेटा के जरिए ये जांच कर रही हैं कि कर्मचारी किन किन वित्तीय सुविधाओं का ज्यादा लाभ ले रहे हैं और कौन सी उनके लिए फायदेमंद नहीं है। इसके आधार पर कंपनियां कर्मचारियों के लिए ज्यादा फायदेमंद भत्ते और सुविधाएं लेकर आ रही हैं। जिससे कर्मचारी खुश रहें और नौकरी छोड़ कर न जाएं।

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