इंग्लैंड के वेस्ट मिडलैंड्स इलाके में मारपीट करने के आरोप में एक 37 वर्षीय ब्रिटिश सिख तिरमिंदर सिंह लाल्ली को कोर्ट ने एक साल की जेल की सजा सुनाई है। उनके ऊपर एक शख्स के साथ गलत व्यवहार करने और हिंसात्मक रुख अपनाने का आरोप है। तिरमिंदर के मुताबिक, घटना उस समय हुई, जब वह अपनी कार से कहीं जा रहे थे और उन्हें लगा कि किसी ने उन पर नस्लीय टिप्पणी की। वे गुस्से में अपनी कार से बाहर निकले। इसके बाद शख्श ने उन पर हमला भी किया, जिसके बाद वह एक पोल से टकरा गए। जवाब में उन्होंने उस व्यक्ति को एक के बाद एक कई मुक्के भी जड़े।
तिरमिंदर ने की मारपीट की बात स्वीकार
वॉल्वरहैम्प्टन क्राउन कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सिंह ने हाथापाई की बात स्वीकार की थी और कहा कि उन्होंने इसलिए मारपीट की, क्योंकि उन्हें लगा कि उन पर नस्लवादी टिप्पणी हुई है। बर्मिंघम लाइव कोर्ट की रिपोर्ट में जिला न्यायाधीश एड्रियन लोअर के हवाले से कहा गया था कि ये घटनाएं इसलिए हुईं क्योंकि तिरमिंदर एक गुस्सैल व्यक्ति हैं।
कोर्ट ने कहा कि कार्यक्षेत्र में आपको अपने धर्म के कारण दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा था, जिसका आपके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव भी पड़ा और इस वजह से आप दवाएं भी ले रहे हैं। अदालत ने कहा कि इसका मतलब यह है कि आप उन चीजों पर बुरी तरह प्रतिक्रिया देते हैं, जिन्हें आप अपने प्रति नस्लवादी मानते हैं या फिर जिन्हें आप अपने रोजमर्रा के कामकाज के लिए अड़चन मानते हैं।
तिरमिंदर पर किया गया हमला
दूसरी ओर उस व्यक्ति ने कोर्ट को बताया कि मैं एक खंभे के पास खड़ा था। तभी तिरमिंदर बहुत तेजी से गाड़ी चलाते हुए वहां आया। मैंने उसे रोका तो वह गुस्से में बाहर निकला और हिंसक बर्ताव करने लगा। इसके बाद मैंने उसके सिर के खंभे पर दे मारा। इससे पहले कि वहां मौजूद लोग कुछ समझ पाते तिरमिंदर ने उस व्यक्ति की पिटाई कर दी।
तिरमिंदर के वकील ने अदालत से कहा कि उसे (तिरमिंदर) को ऐसा नहीं करना चाहिए था। वह इसे स्वीकार करता है। वह मानता है कि उसने जो किया वह गलत था। इसके बाद कोर्ट ने हिंसा करने के आरोप में उसे एक साल की जेल की सजा सुनाई।