रूस के कजान में आयोजित दो दिवसीय 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन हो गया है। इस सम्मेलन से इतर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पांच साल बाद औपचारिक बैठक की। सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि तीस से अधिक देशों ने ब्रिक्स में शामिल होने की इच्छा जताई है। ब्रिक्स के साथ संपर्क मजबूत करने में वैश्विक दक्षिण और पूर्व के देशों की अभूतपूर्व रुचि को नजरअंदाज करना गलत होगा।
हालांकि उन्होंने कहा कि संतुलन बनाए रखना और ब्रिक्स की प्रभावशीलता में कमी को रोकना भी आवश्यक है। उन्होंने ब्रिक्स का एक नया निवेश मंच स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने कहा कि हमें अर्थव्यवस्था के कम उत्सर्जन मॉडल को संयुक्त रूप से बढ़ावा देने की आवश्यकता है। नया ब्रिक्स वैश्विक निवेश मंच वैश्विक दक्षिण के सभी देशों के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराएगा। वर्तमान में ब्रिक्स के पास दो वित्तीय मंच हैं, पहला न्यू डेवलपमेंट बैंक, जिसका मुख्यालय शंघाई में है और दूसरा कंटीजेंट रिजर्व अरेंजमेंट।
भारत की आर्थिक वृद्धि कई ब्रिक्स देशों के लिए उदाहरण: पुतिन
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत की आर्थिक वृद्धि की सराहना की और कहा कि भारत कई ब्रिक्स देशों के लिए एक उदाहरण है। उन्होंने शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पीएम मोदी का धन्यवाद किया।
रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी तास ने पुतिन के हवाले से कहा कि हम सभी उच्च आर्थिक विकास दर सुनिश्चित करने की आवश्यकता के बारे में बात करते हैं। आप (मोदी) इसे सफलतापूर्वक करने में कामयाब रहे हैं। हम आपको इन परिणामों के लिए बधाई देते हैं। 7.5 फीसदी की वृद्धि हममें से कई लोगों के लिए एक उदाहरण है। आपकी पहल के लिए धन्यवाद। भारत की अर्थव्यवस्था इस वर्ष 7 प्रतिशत और 2025 में 6.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
ब्रिक्स को शांति का वाहक बनाना चाहिए: शी जिनपिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि सदस्य देशों को ब्रिक्स को शांति का वाहक और साझा सुरक्षा का संरक्षक बनाना चाहिए। कहा कि यूक्रेन संकट को यथाशीघ्र खत्म करने के लिए युद्ध क्षेत्र का विस्तार नहीं होने देने, जंग को नहीं बढ़ाने और किसी भी पक्ष को उकसावा नहीं देने के तीन सिद्धांतों पर कायम रहना चाहिए।
उन्होंने न्याय के पैरोकार के रूप में ब्रिक्स को आगे बढ़ाने और वैश्विक शासन प्रणाली के सुधार का नेतृत्व करने का भी आह्वान किया। साथ ही कहा कि मौजूदा हालात में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में सुधार की तत्काल आवश्यकता है और ब्रिक्स के नए विकास बैंक को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि चीन ब्रिक्स देशों में अगले पांच वर्षों में 10 शिक्षण केंद्रों की स्थापना करेगा। इसका उद्देश्य 1,000 शिक्षा प्रशासकों, शिक्षकों और छात्रों को प्रशिक्षण के अवसर मुहैया करना है।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को इनोवेशन का मंच बनना चाहिए और उच्च गुणवत्ता वाले विकास के लिए अग्रणी समूह के रूप में काम करना चाहिए। ब्रिक्स के सदस्यों को हरित ब्रिक्स बनाने के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने ब्रिक्स सदस्यों से इस बहुपक्षीय मंच को ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए एकजुटता और सहयोग के एक प्रमुख केंद्र तथा वैश्विक शासन सुधार के लिए एक अग्रणी शक्ति बनाने की अपील की।
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