ब्राजील में हो रहे ब्रिक्स देशों के 17वें शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूटीओ) में व्यापक सुधार की बात पर जोर दिया गया। ब्रिक्स देश के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि यूएन खासकर इसकी सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) को और ज्यादा लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्वकारी, प्रभावशाली और विकासशील देशों के लिए समान अवसर वाला बनाया जाए। इसके साथ ही संयुक्त घोषणा में यूएनएससी के स्थाई सदस्य रूस और चीन ने भारत और ब्राजील की संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका की दावेदारी का समर्थन दोहराया।
बता दें कि भारत लंबे समय से यूएनएसी में की स्थायी सदस्यता चाहता है ताकि वह विकासशील देशों की आवाज को वहां बेहतर ढंग से रख सके। अभी सुरक्षा परिषद में 15 देश हैं, जिनमें से 5 स्थायी सदस्य हैं जिनके पास वीटो पावर है।
सुरक्षा परिषद को बेहतर बनाने पर जोर
ब्रिक्स नेताओं ने अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों की वैध आकांक्षाओं को भी समर्थन दिया। साथ ही कहा कि सुरक्षा परिषद को ऐसी बनानी होगी जो आज की वैश्विक चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सके। ब्रिक्स ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार के जरिए ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आवाज को और ताकत मिलनी चाहिए। इतना ही नहीं इस घोषणा में अफ्रीकी देशों की मांगों को भी मान्यता दी गई, जो एजुलविनी सहमति और सिरते घोषणा में दर्ज हैं।
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व्यापार नीति और WTO को लेकर चिंता
इसके साथ ही घोषणा में यह भी कहा गया कि अमेरिका जैसे कुछ देश जो मनमाने ढंग से टैरिफ (शुल्क) और अन्य व्यापारिक रोक लगाते हैं, वे वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचा रहे हैं। साथ ही डब्ल्यूटीओ के नियमों के खिलाफ हैं। ब्रिक्स नेताओं ने डब्ल्यूटीओ आधारित नियमों वाले, पारदर्शी, निष्पक्ष और सभी के लिए समान अवसर वाले व्यापारिक ढांचे का समर्थन किया। उन्होंने डब्ल्यूटीओ की 30वीं वर्षगांठ पर उसके महत्व को दोहराया और इसके सुधार की आवश्यकता को भी बताया। साथ ही, उन्होंने डब्ल्यूटीओ के विवाद समाधान तंत्र को फिर से प्रभावी बनाने की मांग की और इथियोपिया व ईरान के डब्ल्यूटीओ सदस्य बनने के प्रयासों का समर्थन किया।
एकतरफा प्रतिबंधों की निंदा
ब्रिक्स देशों ने बिना संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी वाले किसी भी आर्थिक प्रतिबंध की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं और इससे प्रभावित देशों के लोगों को स्वास्थ्य, भोजन और विकास के अधिकारों से वंचित होना पड़ता है।
दुनिया में बढ़ते सैन्य खर्चे पर चिंता
नेताओं ने दुनिया में लगातार बढ़ रहे सैन्य खर्च पर भी चिंता जताई और कहा कि यह विकासशील देशों के लिए वित्त की कमी का कारण बन रहा है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों को सुरक्षा से जोड़ने की कोशिश भी गलत दिशा में ले जा सकती है। घोषणा में कहा गया कि दुनिया में बढ़ते ध्रुवीकरण और अविश्वास के माहौल में, हम अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता महसूस करते हैं।
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क्या रहा इस बार ब्रिक्स सम्मेलन का थीम
गौरतलब है कि यह सम्मेलन ब्राजील की मेजबानी में हुआ, जिसमें पुराने 5 देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) के अलावा नए सदस्य देशों मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया ने हिस्सा लिया। ब्राजील ने 1 जनवरी 2025 से ब्रिक्स अध्यक्षता संभाल ली है। इस बार की थीम रही- समावेशी और टिकाऊ वैश्विक शासन के लिए ग्लोबल साउथ का सहयोग मजबूत करना।