बृहस्पतिवार की रात तक यूरोपीय संघ (ईयू) से ब्रिटेन के व्यवस्थित और पूरी तरह से अलग होने की प्रक्रिया संपन्न हो गई। इस आर्थिक अलगाव के साथ दोनों देशों की लंबी ब्रेग्जिट यात्रा भी खत्म हो गई है। नए साल पर प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने अपने एक वीडियो संदेश में कहा कि अब हम आजादी के साथ अपने फैसले ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के लिए यह एक शानदार पल है।
ब्रेग्जिट (ब्रिटेन का यूरोपीय संघ से अलग होना) के साथ ही ईयू का आकार जरूर कुछ छोटा हो गया है लेकिन समूह के देशों के साथ ब्रिटेन के साथ व्यापार जारी रहने को लेकर शुरू हुई अड़चनें भी खत्म हो गई हैं। बृहस्पतिवार रात 11 बजे ब्रिटेन के ईयू से अलग होने की प्रक्रिया पूरी हो गई। ब्रिटेन ने ईयू का बड़ा इकलौता बाजार, वस्तुएं और सेवाएं सब कुछ छोड़ दिया। नए समझौते में कुछ शर्तें व बंदिशें हैं लेकिन ब्रेग्जिट समर्थकों का मानना है कि अब ब्रिटेन आजाद होकर फैसले ले पाएगा। ब्रेग्जिट समर्थक मानते हैं कि पीएम जॉनसन की कोशिशों के चलते ही कई बाधाओं के बावजूद यह समझौता पूरी तरह से लागू हो पाया।
दोनों देश अब बने प्रतिद्वंदी
ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन द्वारा यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ ब्रेग्जिट (ब्रिटेन का यूरोप से बाहर होना) व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर के साथ ही दोनों देश दोस्त से प्रतिद्वंद्वी बन चुके हैं।
ब्रिटिश संसद ने इसे 73 के मुकाबले 521 मतों से मंजूरी दे दी। शुक्रवार से दोनों पक्षों ने नए सिरे से शुरुआत की। जबकि यह रिश्ता कुछ वर्षों का नहीं बल्कि 1,000 वर्षों के ताने-बाने में गुंथा है।
ईयू से औपचारिक तौर पर अलग होने के 11 माह बाद शुक्रवार से ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के लिए ब्रेग्जिट वह सच्चाई हो जाएगी जिसे दोनों तरफ के लोग रोजमर्रा की जिंदगी में महसूस करेंगे। बृहस्पतिवार को इसका संक्रमणकाल खत्म होने के बाद ब्रिटेन दुनिया के सबसे बड़े कारोबारी संघ से अलग हो जाएगा।
इस बीच, सीमा शुल्क नियंत्रण, लालफीताशाही और सालों चली अलगाव प्रक्रिया की कड़वी यादें नए दौर में दोनों को चुभेंगी। एक-दूसरे से अलग होने की प्रक्रिया भले साढ़े चार साल चली हो, लेकिन इसके ढीले सिरों को कसने में कई और महीने या साल लगेंगे।
सेंटर फॉर यूरोपीयन रिफॉर्म थिंक टैंक के चार्ल्स ग्रांट के मुताबिक, किसी न किसी वजह को लेकर ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के साथ आने वाले कई दशकों तक लगातार बातचीत करते रहना होगा।
सहमति के बीच उच्च मानकों की चुनौती
समझौते में दोनों पक्षों के बीच प्रमुख मांगों पर सहमति तो बन गई है और इसने ईयू के बाजारों को ब्रिटेन के लिए शुल्क मुक्त बनाकर जरूरी संरक्षण भी दे दिया है लेकिन इसके लिए ब्रिटेन को सामाजिक, रोजगार और पर्यावरण के उच्च मानकों को बनाए रखना होगा। ईयू खुद को सर्वोच्च साझेदार मानता है जो 45 करोड़ ग्राहकों का संघ है। ऐसे में ब्रिटेन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
यूरोप की चिंता, ब्रिटेन की परेशानी
यूरोपीय संघ को चिंता है कि ब्रिटेन मानकों को घटाते हुए कम टैक्स वाला बनकर यूरोप के दरवाजे पर ही उससे बढ़त ले लेगा। इसी कारण ब्रेग्जिट डील में उसने समान स्तर के तहत एक सीमा तय की गई है जिसके आगे जाने पर ब्रिटेन को हर्जाना देना होगा। इससे ब्रिटेन को परेशानी आ सकती है।