COP 29 में कुछ देशों ने पिछले वर्ष के COP 28 में हुए समझौतों को दोबारा तय करने का लक्ष्य रखा था। इसमें सभी देशों से जीवाश्म ईंधन से दूर जाने का आह्वान किया गया था। हालांकि इस प्रस्ताव का विरोध हुआ और COP 29 में जीवाश्म ईंधन शब्द का उल्लेख तक नहीं किया गया।
अजरबैजान के बाकू में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के बाद अब अगले साल बेलेम में होने वाले सम्मेलन को लेकर ब्राजील ने तैयारी शुरू कर दी है। सम्मेलन में शामिल ब्राजील की एक अधिकारी ने कहा कि अगले साल होने वाले सम्मेलन में ब्राजील इस बात पर जोर देगा कि दुनिया में जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल कैसे कम किया जा सकता है।
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ब्राजील की जलवायु परिवर्तन मामलों की राष्ट्रीय सचिव एना टोनी ने कहा कि उनके देश ने अन्य देशों को अगले वर्ष की शुरुआत तक अधिक महत्वाकांक्षी जलवायु योजनाएं प्रस्तुत करने के प्रति जागरूक करने के लिए एक कूटनीतिक प्रयास शुरू किए हैं। इसे राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के रूप में जाना जाता है। पेरिस समझौते के तहत देशों को हर पांच साल में एनडीसी प्रस्तुत करना आवश्यक है।
टोनी ने कहा कि हम बाकू में प्रस्ताव लेकर आए थे कि हम जीवाश्म ईंधन से कैसे दूर जा रहे हैं? यह चर्चा महत्वपूर्ण और जरूरी है। हमें उम्मीद है कि COP 30 में भी इस पर बहस होगी। ब्राजील ने अन्य देशों को अधिक महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्य अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिये एनडीसी कूटनीति शुरू की है।
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उन्होंने यह भी कहा कि COP 30 का उद्देश्य देशों को उनके जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन, प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण सहायता प्रदान करने के लिए एक रूपरेखा तैयार करनी होगी।
टोनी ने कहा कि ब्राजील अपने एनडीसी के साथ बाकू आया था। इसका लक्ष्य उत्सर्जन में 67 प्रतिशत की कमी लाना था। हम समझते हैं कि इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हमें कैसे समर्थन की आवश्यकता है। मगर हम बाकू से अपनी जरूरत के सभी संसाधन लेकर नहीं जा पाएंगे। हमें उम्मीद है कि हम उन तक पहुंचने के लिए एक रूपरेखा बना पाएंगे। मुझे उम्मीद है कि COP 30में हम यह रूपरेखा तैयार कर पायेंगे।
COP 29 में कुछ देशों ने पिछले वर्ष के COP 28 में हुए समझौतों को दोबारा तय करने का लक्ष्य रखा था। इसमें सभी देशों से जीवाश्म ईंधन से दूर जाने का आह्वान किया गया था। हालांकि इस प्रस्ताव का विरोध हुआ और COP 29 में जीवाश्म ईंधन शब्द का उल्लेख तक नहीं किया गया। अब देखने वाली बात होगी कि ब्राजील अगले सम्मेलन में इस मुद्दे को कैसे लेकर आता है?