अपने से गरीब आदमी को देखते ही यदि आप अलग तरह से प्रतिक्रिया करने लगते हैं तो इसके लिए आपके संस्कार नहीं बल्कि दिमाग का प्राकृतिक व्यवहार जिम्मेदार है। एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि अलग सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि वाले आदमी से बात करते समय किसी भी आदमी का दिमाग अपने आप ही अलग तरह का व्यवहार करने लगता है।
यूसीएल और येल के शोधकर्ताओं की नई इमेजिंग रिसर्च के मुताबिक, दिमाग का यह व्यवहार अपने से गरीब आदमी के साथ बात करते समय अलग और अपने से ज्यादा अमीर पृष्ठभूमि वाले के साथ बात करते हुए अलग तरह का होता है।
सोशल कॉगनिटिव एंड अफेक्टिव न्यूरोसाइंस में प्रकाशित इस अध्ययन में 39 जोड़ों ने आपस में बातचीत की। इस दौरान सभी ने दिमागी गतिविधियों की निगरानी को ट्रैक करने के लिए खास हेडसेट पहनकर रखे थे।
शोधकर्ताओं ने शिक्षा व पारिवारिक आय के हिसाब से बेहद अलग सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले जोड़ों के दिमाग के बायें अगले हिस्से (बयां अग्र मस्तिष्क) में बेहद तीव्र गतिविधि दर्ज की। दिमाग का बायां डोरसोलेट्रियल प्रिफ्रंटल कार्टेक्स कहे जाने वाला यह हिस्सा भाषा उत्पादन और नियम आधारित भाषा के साथ संज्ञानात्मक और चौकस नियंत्रण से जुड़ा हुआ है।
इस खोज से पहले हो चुके उन शोध की पुष्टि हुई है, जिनमें कहा गया था कि अग्र मस्तिष्क का सिस्टम पूर्वाग्रह को पहचानने और हमें अपने व्यवहार में पूर्वाग्रह से जुड़े हावभाव को नियंत्रित करने में मदद करता है।
यूसीएल मेडिकल फिजिक्स एंड बायोमेडिकल इंजीनियरिंग एंड येल के प्रोफेसर जॉय हिर्स ने कहा, पहली बार हम अलग पृष्ठभूमि वाले लोगों के बीच सामाजिक बातचीत में उपयोग होने वाले तंत्रिका तंत्र को पहचानने में सफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे यकीन है हमारी खोज एक आशापूर्ण संदेश देगी।