ऐसे समय पर जब लोग जलवायु परिवर्तन को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं तब ग्रेटा ने वैश्विक नेताओं से चुभने वाले सवाल पूछकर उन्हें झकझोर कर रख दिया। वह अपना स्कूल छोड़कर लोगों को उनकी जिम्मेदारियों का अहसास दिलाने का काम कर रही हैं। स्वीडन की रहने वाली ग्रेटा जलवायु परिवर्तन को लेकर दुनियाभर में काम करती हैं। वह अमेरिका से लेकर लंदन और फ्रांस में लोगों को जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर जागरूक करने के काम में लगी हुई हैं।
हर शुक्रवार करती हैं संसद के बाहर प्रदर्शन
थनबर्ग के स्कूल का स्ट्राइक फॉर क्लाइमेट या फ्यूचर फॉर फ्राइडे कैंपेन पूरी दुनिया में मशहूर है। पिछले साल अगस्त महीने से इस अभियान की शुरुआत हुई थी। इस अभियान की शुरुआत करते हुए उन्होंने हर शुक्रवार को स्कूल जाना छोड़ दिया। वह हर शुक्रवार स्वीडन की संसद के बाहर तख्ती लेकर प्रदर्शन करतीं हुईं दिख जाती हैं। सांसदों के अलावा वह वहां से गुजरने वाले लोगों से दुनिया को बचाने का आग्रह करती हैं।
जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर दुनियाभर के लोगों के लिए ग्रेटा एक आइकन बन गई हैं। वह जलवायु परिवर्तन पर बड़े-बड़े भाषण देती हैं। नवंबर 2018 में उनके अभियान में 24 देशों के लगभग 17 हजार छात्रों ने हिस्सा लिया था। मार्च 2019 तक उनके अभियान से 135 देशों के 20 लाख बच्चे जुड़ चुके थे। वहीं इस साल अगस्त में यह संख्या बढ़कर 36 लाख हो गई।
11 साल की उम्र में समझने लगीं थी जलवायु परिवर्तन का संकट
ग्रेटा थनबर्ग का जन्म तीन जनवरी 2003 को हुआ है। उनकी मां मलेना इर्नमैन ओपेरा सिंगर और पिता स्वांते थनबर्ग अभिनेता हैं। ग्रेटा ने आठ साल की उम्र में पहली बार जलवायु परिवर्तन के बारे में सुना था। 11 साल की उम्र की तक उन्होंने जलवायु परिवर्तन के संकट को समझना शुरू कर दिया था। वह अपनी बात को बेबाक और तथ्य आधारित तरीके से रखने के लिए जानी जाती हैं।