बाकवा जिले पर तालिबान का नियंत्रण है और वो अपनी गतिविधियों के लिए ड्रग्स बनाने के ठिकानों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इस बमबारी में जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया उन पर तालिबान का नियंत्रण पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ है। जांच के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क से जुडे आपराधिक संगठन इन्हें संचालित कर रहे थे।
यूएन मिशन और मानवाधिकार कार्यालय ने ड्रग्स बनाने के ठिकानों पर हवाई बमबारी को रोके जाने की एक अपील जारी की है। उनके मुताबिक इस तरह के हमले पहले भी होते आए हैं लेकिन यह पहली बार है जब इतनी बडी संख्या में आम लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। जांच के अनुसार अफगानिस्तान में अमेरिकी सुरक्षाबलों ने अपनी समीक्षा में पाया कि हवाई कार्रवाई में कोई आम नागरिक हताहत नहीं हुआ।
अमेरिका की नीति है कि यदि किसी आर्थिक प्रतिष्ठान से युद्धक गतिविधियों में किसी पक्ष को मदद मिलती है तो उसे सैन्य निशाना बनाया जा सकता है, लेकिन रिपोर्ट बताती है कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के विपरीत है। अफगानिस्तान में ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल और कारोबार से उपजते खतरे को स्वीकार किया गया है और इससे देश के लोगों को हो रहे नुकसान के प्रति चिंता भी जताई गई है।
लेकिन रिपोर्ट बताती है कि हवाई बमबारी के विकल्प के तौर पर आम नगारिकों की जान को खतरे में डालने वाले सैन्य अभियानों के बजाय, उपयुक्त और कानूनी कार्रवाई के जरिए ही इस चुनौती से निपटा जाना चाहिए। इस रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की गई है और जवाबदेही तय करने के लिए प्रयासों की आवश्यकता और पीड़ितों और उनके परिजनों को सहारा देने के लए उचित उपायों की अहमियत को भी रेखांकित किया गया है।