India-Bangladesh Relations: बांग्लादेश चुनाव के नतीजों के बीएनपी सरकार बना रही है। इसी के साथ प्रधानमंत्री का पद तारिक रहमान संभालेंगे। इससे पहले उनके सलाहकार ने भारत के साथ रिश्तों पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ संबंधों में नए सिरे से शुरुआत चाहता है।
बांग्लादेश को लगभग डेढ़ साल बाद स्थायी सरकार मिलने जा रही है। 12 फरवरी को हुए आम चुनाव के नतीजे बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) के भारी बहुमत के साथ पक्ष में आए। ऐसे में अब 17 फरवरी को तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। इससे पहले तारिक रहमान के सलाहकार का भारत के साथ संबंधों पर बड़ा बयान सामने आया है।
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'बदली वास्तविकता को स्वीकार करे भारत'
न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में तारिक रहमान के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा है कि बांग्लादेश भारत के साथ नए सिरे से संबंधों की शुरुआत करना चाहता है। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश की बदली हुई राजनीतिक वास्तविकता को स्वीकार करना भारत की जिम्मेदारी है।
आपसी लाभ के लिए सहयोग की अपील
अपने बयान में उन्होंने काह कि बांग्लादेश, भारत के साथ नए सिरे से संबंध स्थापित करना चाहता है, क्योंकि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी अवामी लीग पार्टी अब सत्ता में नहीं हैं। बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान के सलाहकार ने जोर देते हुए यह भी कहा कि दोनों देशों को 'पारस्परिक लाभ' के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
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बता दें कि तारिक रहमान की पार्टी बीएनपी ने शुक्रवार (13 फरवरी) को जारी हुए चुनाव परिणाम में ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए दो-तिहाई से अधिक सीटों पर विजय हासिल की है। शनिवार (14 फरवरी) को दिए एक साक्षात्कार में कबीर ने इस बात पर जोर दिया कि बीएनपी की शानदार चुनावी जीत के बाद बांग्लादेश में बदली हुई राजनीतिक वास्तविकता को पहचानने की जिम्मेदारी भारत पर है।
शेख हसीना को बताया आतंकी
हुमायूं कबीर ने कहा, 'यह बदलाव भारत की मानसिकता में आना चाहिए। शेख हसीना और अवामी लीग आज के बांग्लादेश में मौजूद नहीं हैं। जनता ने बीएनपी के पक्ष में स्पष्ट फैसला दिया है।' इसी के साथ उन्होंने 2024 के अगस्त विद्रोह के बाद भारत आई हसीना को 1500 से अधिक लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार 'आतंकवादी' बताया। वहीं कबीर ने भारत सरकार से आग्रह किया कि वह यह सुनिश्चित करे कि हसीना या अवामी लीग के अन्य नेताओं द्वारा उसकी भूमि का उपयोग ऐसे तरीकों से न किया जाए जिससे बांग्लादेश में स्थिरता प्रभावित हो सके।
उन्होंने आगे कहा, 'बांग्लादेश की संप्रभुता को कमजोर करने वाली किसी भी गतिविधि में भारत को सहभागी नहीं माना जाना चाहिए। एक बार यह समस्या हल हो जाए तो सामान्य राजनयिक सहयोग फिर से शुरू हो सकता है। हम पड़ोसी हैं और हमें आपसी लाभ के लिए मिलकर काम करना चाहिए।'