पाकिस्तान में ईशनिंदा मामले में गिरफ्तार किए जाने वाले चीनी नागरिक को आतंकवाद-रोधी अदालत द्वारा जमानत दिए जाने के बाद रिहा कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार उसे अज्ञात स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है। एबटाबाद के उत्तर-पश्चिमी शहर में अदालत के न्यायाधीश ने चीनी नागरिक से दो लाख मुचलका भरवाने के बाद उसे रिहा किया था।
अदालत ने बताया कि कोहिस्तान पुलिस ने चीनी नागरिक के खिलाफ झूठा मामला दर्ज किया था। अदालत ने बताया कि रिकॉर्ड के अनुसार अअपराधी ने ऐसा कोई अपराध नहीं किया है, इसलिए उसे जमानत दिया जाता है।
क्या था पूरा मामला
यह गटना 16 अप्रैल की है, जब डासू पनबिजली परियोजना में काम करने वाले एक चीनी नागरिक पर मजदूरों ने इस्लाम का अपमान करने का आरोप लगाया। पुलिस ने चीनी नागरिक पर पाकिस्तान की दंड संहिता की धारा 295-सी के तहत मुकदमा दर्ज किया था। बता दें कि यह धारा पैगंबर मोहम्मद के सम्मान की हिफाजत के लिए बनाया गया है। इसके अलावा परियोजना पर काम करने वाले सैकड़ों मजदूरों ने राजमार्ग पर जाम कर दिया और गिरफ्तारी की मांग करने लगे थे।
दो वकीलों ने अदालत में याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व किया। चीनी नागरिक को सुरक्षा कारणों की वजह से अदालत नहीं लाया गया था। संयुक्त जांच दल ने आरोप लगाने वालों के बयान लिए, जिसे उन्होंने अदालत और चीनी राष्ट्रीय के सामने पेश किया। सभी बयानों को देखने के बाद अदालत ने बताया कि घटना के दो दिन बाद जिन मजदूरों ने मामला दर्ज कराया था, उनमे से कोई भी अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश नहीं कर पाए हैं और न ही वे जेआईटी के सामने आरोपों को साबित कर पाए।
पाकिस्तान में ईशनिंदा पर मिलती है मौत की सजा
पाकिस्तान में ईशनिंदा पर मौत की सजा या उम्र कैद की सजा दी जाती है। आलोचकों का मानना है कि अल्पसंख्यक धर्मों को सताने और अल्पसंख्यकों को गलत तरीके से निशाना बनाने के लिए ईशनिंदा कानूनों का इस्तेमाल किया जाता है। करीब दो साल पहले यह ईशनिंदा मामले में एक श्रीलंकाई नागरिक को भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला था।