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काले गैंडे सिर्फ 2.5 हजार बचे, फिर भी द. अफ्रीका को दोगुने शिकार की मंजूरी

अमर उजाला रिसर्च टीम Published by: देव कश्यप Updated Tue, 27 Aug 2019 04:51 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर

विश्व में सिर्फ 2.5 हजार काले गैंडे बचे हैं, दक्षिण अफ्रीका में इनकी संख्या है दो हजार। फिर भी दक्षिण अफ्रीका ने इन गैंडों की ट्रॉफी हंटिंग संख्या 5 से बढ़ाकर 10 करने की अनुमति मांगी, जिस पर अंतरराष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति व्यापार संधि (साइट्स) की बैठक में उसे कनाडा और यूरोपीय संघ की मदद से बहुमत का समर्थन भी मिल गया। 28 अगस्त तक चलने वाली इस 10 दिवसीय बैठक के समापन सत्र में प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। बैठक में अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय संघ के व्यवहार से संकेत मिला कि वे वन्य जीव संरक्षण के बजाय शिकार व कारोबार के ज्यादा इच्छुक हैं।

दक्षिण अफ्रीका का कहना है कि काले गैंडों के शिकार का कोटा देश में गैंडों की कुल आबादी का 0.5 प्रतिशत और अधिकतम 10 होना चाहिए। उसका तर्क है कि ट्रॉफी हंटिंग पैसा कमाने का बड़ा जरिया है, इससे जुटाए फंड का वह काले गैंडों के ही संरक्षण में उपयोग करेगा। कुछ देशों और संगठनों ने इसका विरोध किया, लेकिन बोत्सवाना, जिम्बाब्वे, ईस्वातिनी (पूर्व में स्वाजीलैंड) के साथ कनाडा, यूरोपीय संघ के सभी 28 देशों ने इसका समर्थन किया और प्रस्ताव पास हो गया। काले गैंडों की संख्या 1992 में 800 ही रह गई थी।

जानिए साइट्स और इस बैठक का महत्व

शिकार और कारोबार से पृथ्वी से लुप्त हो रहे जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों को बचाने के लिए 1975 में साइट्स संधि की गई। हर तीन साल में इसकी बैठक होती है जहां करीब 35 हजार जीवों-पौधाें और उसने जुड़े हजारों करोड़ डॉलर के वैश्विक कारोबार पर निर्णय लिए जाते हैं। इसमें 183 देश व संगठन शामिल होते हैं। साइट्स के अंतिम निर्णय का पालन न करने वाले देश से बाकी 182 देश व संगठन वन्यजीव कारोबारी संबंध खत्म कर लेते हैं। खतरे के स्तर के अनुसार जीवों-पौधों को एक से तीन सूचियों बांटा गया है।

  • सूची 1 : सबसे दुर्लभ, प्राकृतिक आवासों व जंगलों से पकड़ने पर रोक
  • सूची 2 : संकटग्रस्त, विशेष अनुमति के बाद ही समिति कारोबार किया जा सकता है
  • सूची 3 : कम संकटग्रस्त, साइट्स और संबंधित देश से अनुमति के बाद ही कारोबार संभव
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प्रतीकात्मक तस्वीर
विश्व में सिर्फ 2.5 हजार काले गैंडे बचे हैं, दक्षिण अफ्रीका में इनकी संख्या है दो हजार। फिर भी दक्षिण अफ्रीका ने इन गैंडों की ट्रॉफी हंटिंग संख्या 5 से बढ़ाकर 10 करने की अनुमति मांगी, जिस पर अंतरराष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति व्यापार संधि (साइट्स) की बैठक में उसे कनाडा और यूरोपीय संघ की मदद से बहुमत का समर्थन भी मिल गया। 28 अगस्त तक चलने वाली इस 10 दिवसीय बैठक के समापन सत्र में प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। बैठक में अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय संघ के व्यवहार से संकेत मिला कि वे वन्य जीव संरक्षण के बजाय शिकार व कारोबार के ज्यादा इच्छुक हैं।

दक्षिण अफ्रीका का कहना है कि काले गैंडों के शिकार का कोटा देश में गैंडों की कुल आबादी का 0.5 प्रतिशत और अधिकतम 10 होना चाहिए। उसका तर्क है कि ट्रॉफी हंटिंग पैसा कमाने का बड़ा जरिया है, इससे जुटाए फंड का वह काले गैंडों के ही संरक्षण में उपयोग करेगा। कुछ देशों और संगठनों ने इसका विरोध किया, लेकिन बोत्सवाना, जिम्बाब्वे, ईस्वातिनी (पूर्व में स्वाजीलैंड) के साथ कनाडा, यूरोपीय संघ के सभी 28 देशों ने इसका समर्थन किया और प्रस्ताव पास हो गया। काले गैंडों की संख्या 1992 में 800 ही रह गई थी।

जानिए साइट्स और इस बैठक का महत्व

शिकार और कारोबार से पृथ्वी से लुप्त हो रहे जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों को बचाने के लिए 1975 में साइट्स संधि की गई। हर तीन साल में इसकी बैठक होती है जहां करीब 35 हजार जीवों-पौधाें और उसने जुड़े हजारों करोड़ डॉलर के वैश्विक कारोबार पर निर्णय लिए जाते हैं। इसमें 183 देश व संगठन शामिल होते हैं। साइट्स के अंतिम निर्णय का पालन न करने वाले देश से बाकी 182 देश व संगठन वन्यजीव कारोबारी संबंध खत्म कर लेते हैं। खतरे के स्तर के अनुसार जीवों-पौधों को एक से तीन सूचियों बांटा गया है।
  • सूची 1 : सबसे दुर्लभ, प्राकृतिक आवासों व जंगलों से पकड़ने पर रोक
  • सूची 2 : संकटग्रस्त, विशेष अनुमति के बाद ही समिति कारोबार किया जा सकता है
  • सूची 3 : कम संकटग्रस्त, साइट्स और संबंधित देश से अनुमति के बाद ही कारोबार संभव

भारत ने शीशम के ज्यादा कारोबार की छूट मांगी

भारत ने बैठक में शीशम वृक्षों के ज्यादा दोहन की अनुमति मांगी, लेकिन शीशम का मसला दूसरी सूची में होने से इस पर चर्चा नहीं की गई। भारत यहां पांच जीवों-पौधों के संरक्षण के मामले उठा रहा है। इनमें विशेष प्रजाति के ऊदबिलाव, टोके गेको प्रजाति की छिपकली, शीशम वृक्ष, भारतीय स्टार कछुए और वेजफिश शामिल हैं। शीशम के कारोबार को सूची 2 में रखा गया था।

भारत के अनुसार देश में शीशम के पेड़ सुरक्षित व बहुतायत में हैं। उन पर विलुप्ति का खतरा नहीं है। कारोबारी रोक की वजह से भारतीय हस्तशिल्प उद्योग और 50 हजार शिल्पियों पर असर पड़ रहा है। एक हजार करोड़ रुपये की निर्यात क्षमता के बावजूद भारत 2018 में 617 करोड़ की शीशम की लकड़ी का ही निर्यात कर सका। इसे सूची 2 से हटाया जाना चाहिए। लेकिन साइट्स ने 21 अगस्त के सत्र में इस प्रस्ताव को चर्चा में नहीं लिया। ऐसे में छूट का इंतजार और लंबा हो सकता है।

वेज फिश : बड़ी सफलता वेजफिश के संरक्षण में मिली है। इसे सूची 2 में शामिल कर लिया गया है। यह पश्चिमी हिंद महासागर में मिलती है लेकिन इसके फिन और मांस की वजह से हुए शिकार ने इसे विलुप्ति की कगार पर ला दिया है।

टोके गेको : असम में मिलने वाली टोके गेको छिपकली को सूची 2 में शामिल किया गया है। चीनी दवाओं में इस्तेमाल के लिए शिकार के साथ इसे पालतू बनाने के प्रचलन के कारण इसका जंगल से सफाया हो रहा था।

चीन को नहीं बेचेंगे हाथी

साइट्स में एक प्रस्ताव जंगली हाथियों के निर्यात पर आया। 2015 में जिम्बाब्वे द्वारा चीन और 2016 में ईस्वातिनी द्वारा अमेरिका को जंगली हाथी बेचने की वजह से यह मामला उठा। जिम्बाब्वे के साथ अमेरिका और एक साथ 28 वोट करने वाले यूरोपीय संघ ने प्रस्ताव में कहा कि हाथियों को बेच कर हाथियों के संरक्षण के लिए पैसा जुटा जाता है।

कीनिया, बुर्किना फासो और नाइजर ने कहा कि हाथी बुद्धिमान जीव हैं, अपनी प्रजाति में सामाजिक संपर्क रखते हैं। उन्हें बंधक या अनजान देशों में नहीं रखा जाना चाहिए। यह प्रस्ताव पास नहीं हो सका। अब जंगली हाथियों को चीन, अमेरिका या ऐसे देशों को नहीं बेचा जा सकेगा, जहां वे प्राकृतिक तौर पर नहीं मिलते।

अन्य प्रस्ताव व निर्णय

हाथी दांत का कारोबार अभी बंद नहीं : इस प्रस्ताव को जरूरी वोट नहीं मिले। चीन, अमेरिका, फ्रांस व इंग्लैंड अपने यहां यह कारोबार को बंद कर चुके हैं, लेकिन जापान विश्व का सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। इसकी वजह से हाथियों का शिकार हो रहा है।
  • तीन दशक में 40 प्रतिशत घटे जिराफ : जिराफ को सूची 2 में डालने का प्रस्ताव पास किया गया। बीते तीन दशक में मांस, खाल और हड्डियों के लिए हुए शिकार से 40 प्रतिशत जिराफ घट गए हैं। 
  • साइगा हिरण को मिला संरक्षण : मध्य एशिया के साइगा को विलुप्ति से बचाने के लिए इसके अंतरराष्ट्रीय कारोबार का कोटा तय करने पर निर्णय हुआ।
  • माको शार्क व गिटारफिश को भी बचाने का प्रयास : संकटग्रस्त माको शार्क और गिटार फिश को को सूची 2 में डाला गया।
  • मुलायम आवरण वाले ऊदबिलाव के कारोबार पर रोक : इस ऊदबिलाव को सूची 2 से बढ़ाकर सूची 1 में किया गया। अंतिम निर्णय के बाद इसके कारोबार पर रोक लगेगी।
  • सफेद गैंडे का कारोबार रुका रहेगा : ईस्वातिनी द्वारा दक्षिणी सफेद गैंडे से जुडे़ कारोबार पर रोक हटाने का प्रस्ताव लाया गया था, इसे नकार दिया गया। साथ ही इसे सूची 1 से 2 में करने के नामीबिया के प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया गया।
  • रीव्ज फीजंट व ब्लैक क्राउन्ड क्रेन को ज्यादा सुरक्षा : इन दोनों प्रजाति के पक्षियों को सूची 2 में शामिल कर लिया गया है। 
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