आपने नीले चांद के बारे में तो सुना होगा लेकिन ब्लैक मून के बारे में नहीं सुना होगा। आज यानि 31 जुलाई को उत्तर अमेरिका में यह खगोलीय घटना घटेगी। हालांकि बाकी दुनिया को इसका 30 अगस्त तक इंतजार करना पड़ेगा। यह खगोलीय घटना पिछली बार साल 2016 में घटी थी। जानिए इसका क्या मतलब है और यह क्यों महत्वपूर्ण है।
दरअसल ब्लैक मून एक महीने के भीतर होने वाली वह घटना है जिसमें चांद पूरी तरह से आकाश में समा जाता है और दिखाई नहीं देता। इसे दूसरा नया चांद कहते हैं जो पूरी तरह से काला होने की वजह से दिखाई नहीं देता। यह खगोलीय घटना बहुत कम ही घटित होती है। इसमें चंद्रमा, धरती और सूर्य के बीच मौजूद होता है और सूर्य की रोशनी चंद्रमा के पिछले हिस्से पर पड़ती है। खगोल विज्ञानियों के अनुसार यह लीप ईयर के समान काम करता है।
चंद्रमा को अपना एक चक्र पूरा करने में आमतौर पर करीब 29 दिन लगते हैं। लेकिन महीने लंबे होने की वजह से हम कभी—कभी 32 महीनों में दो पूरे चंद्रमा और दो नए चंद्रमा देखते हैं। एक महीने में दूसरी पूर्णिमा को नीला चांद कहा जाता है जबकि दूसरे नए चंद्रमा को काला चांद यानी ब्लैक मून कहा जाता है। इसे दूसरे अर्थों में अमावस्या भी कह सकते हैं।
सामान्य तौर पर ऐसी खगोलीय घटना केवल फरवरी में ही संभव है क्योंकि इस महीने में दिन सबसे कम होते हैं और यह लगभग एक दशक में एक बार होता है। इसमें धरती के नजदीक होने के कारण चंद्रमा सामान्य से काफी बड़ा होता है। इसे ब्लैक सुपर न्यू मून कह सकते हैं।