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Cyber Threat: इंटरनेट सुरक्षा पर मंडरा रहा अब तक का सबसे बड़ा साइबर खतरा, 2029 तक टूट सकती है सुरक्षा प्रणाली

Thu, 21 May 2026 04:22 AM IST
Devesh Tripathi अमर उजाला नेटवर्क, वॉशिंगटन/टोरंटो।

सार

कनाडा स्थित साइबर सुरक्षा कंपनी इवोल्यूशनक्यू के सह-संस्थापक और सीईओ मिशेल मोस्का के अनुसार क्यू-डे वह समय होगा जब किसी देश, संगठन या विरोधी समूह के पास ऐसा क्वांटम कंप्यूटर होगा जो वर्तमान में इस्तेमाल हो रहे क्रिप्टोग्राफिक कोड को तोड़ सकेगा। क्रिप्टोग्राफी वह तकनीक है जो इंटरनेट पर भेजी जाने वाली जानकारी को एन्क्रिप्ट यानी कूटबद्ध करके सुरक्षित बनाती है।
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साइबर सुरक्षा - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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दुनिया की डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था एक ऐसे संभावित मोड़ की ओर बढ़ रही है, जिसे विशेषज्ञ क्यू-डे कह रहे हैं। यह वह दिन होगा जब क्वांटम कंप्यूटर इतने शक्तिशाली हो जाएंगे कि वे आज इंटरनेट, बैंकिंग, ईमेल, क्रिप्टोकरेंसी और सरकारी संचार की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाले एन्क्रिप्शन को बहुत कम समय में तोड़ सकेंगे।
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विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव धीरे-धीरे नहीं बल्कि अचानक होगा यानी जो सिस्टम आज पूरी तरह सुरक्षित माने जा रहे हैं, वे एक झटके में असुरक्षित हो सकते हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार गूगल ने चेतावनी दी है कि 2029 तक क्वांटम कंप्यूटर कुछ मौजूदा एन्क्रिप्शन प्रणालियों को हैक करने की क्षमता हासिल कर सकते हैं। इससे पहले साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना था कि ऐसा होने में अभी काफी समय लग सकता है। नई समयसीमा ने सरकारों, कंपनियों और साइबर सुरक्षा एजेंसियों के सामने तैयारी के लिए उपलब्ध समय को काफी कम कर दिया है।

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क्यू-डे पर क्या होगा?
कनाडा स्थित साइबर सुरक्षा कंपनी इवोल्यूशनक्यू के सह-संस्थापक और सीईओ मिशेल मोस्का के अनुसार क्यू-डे वह समय होगा जब किसी देश, संगठन या विरोधी समूह के पास ऐसा क्वांटम कंप्यूटर होगा जो वर्तमान में इस्तेमाल हो रहे क्रिप्टोग्राफिक कोड को तोड़ सकेगा। क्रिप्टोग्राफी वह तकनीक है जो इंटरनेट पर भेजी जाने वाली जानकारी को एन्क्रिप्ट यानी कूटबद्ध करके सुरक्षित बनाती है। यही तकनीक ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, मेडिकल रिकॉर्ड, ईमेल और सोशल मीडिया संचार की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

डाटा चोरी कर जमा कर रहे अपराधी
विशेषज्ञों को आशंका है कि कुछ देश या साइबर अपराधी अभी से एन्क्रिप्टेड डाटा चोरी करके उसे संग्रहित कर रहे हैं। इस रणनीति को हार्वेस्ट नाउ, डिक्रिप्ट लेटर कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि आज चोरी किया गया डाटा अभी पढ़ा नहीं जा सकता, लेकिन भविष्य में जब पर्याप्त शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर उपलब्ध होंगे, तब वही डाटा डिक्रिप्ट यानी पढ़ा जा सकेगा। इससे वर्षों पुराने मेडिकल रिकॉर्ड, सरकारी दस्तावेज, वित्तीय जानकारी और निजी संचार उजागर हो सकते हैं।

गूगल और क्लाउडफ्लेयर ने क्यों तय किया 2029 तक का लक्ष्य?
क्वांटम युग को सुरक्षित बनाने के लिए 2029 तक पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी लागू करने का लक्ष्य रखा है। पोस्ट क्वांटम क्रिप्टोग्राफी को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि भविष्य के क्वांटम कंप्यूटर भी उसे आसानी से न तोड़ सकें। गूगल ने अपने ब्लॉग पोस्ट में कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग क्षेत्र में तेजी से हुई प्रगति  के कारण यह नई समयसीमा तय की गई है।
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क्वांटम कंप्यूटर सामान्य कंप्यूटर से कैसे अलग?
सामान्य कंप्यूटर बिट पर काम करते हैं, जहां हर बिट केवल 0 या 1 हो सकती है। इसके विपरीत क्वांटम कंप्यूटर क्यूबिट का उपयोग करते हैं। क्यूबिट एक साथ 0, 1 या दोनों अवस्थाओं में रह सकता है। इस गुण को सुपरपोजिशन कहा जाता है। सरल शब्दों में कहें तो क्वांटम कंप्यूटर एक समय में बहुत अधिक संभावनाओं पर गणना कर सकते हैं।
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