चीन के बारे में शरीफ ने कहा है- पाकिस्तान और चीन का रिश्ता टिकाऊ है। मेरी सरकार चीन-पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरीडोर (सीपीईसी) पर काम आगे बढ़ाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि शांति, सुरक्षा और विकास के मकसदों को हासिल करने के लिए उनकी सरकार अमेरिका के साथ मिल कर काम करेगी। मगर यहां विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका से संबंध सुधारने के लिए शाहबाज शरीफ को अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के शासनकाल में पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों में कई पेच पड़ गए हैँ।
इमरान खान ने अपने शासन के आखिरी दिनों में अमेरिका पर उनकी सरकार को गिराने की साजिश रचने का आरोप लगाया था। लेकिन जानकारों का कहना है कि अमेरिका इसके पहले से ही पाकिस्तान से नाराज था। पिछले साल अफगानिस्तान में काबुल पर तालिबान के कब्जे को आसान बनाने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने जैसी भूमिका निभाई, उसे जो बाइडन प्रशासन ने पाकिस्तान का अमेरिका विरोधी रुख माना था।
इसके बावजूद सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के नेताओं की राय है कि अमेरिका और पाकिस्तान के हित आपस में मेल खाते हैं। इसलिए आपसी रिश्तों में हाल में पड़े पेच टिकाऊ साबित नहीं होंगे। पीएमएल-नवाज के नेता मुशाहिद हुसैन ने वेबसाइट एशिया टाइम्स से कहा- ‘जो बाइडन प्रशासन लोकतंत्र की इतनी बातें करता है। पाकिस्तान एक जीवंत लोकतंत्र है। संभवतः तमाम मुस्लिम देशों के बीच यहीं सबसे ज्यादा आजादी है।’
विशेषज्ञों की राय है कि परंपरागत रूप से पाकिस्तान की विदेश नीति मिलिटरी ऐस्टैबलिशमेंट (सेना और खुफिया नेतृत्व) तय करता रहा है। पाकिस्तानी सेना में भारत विरोधी भावनाएं भरी रही हैँ। लेकिन अमेरिका के प्रति हमेशा ही उसका झुकाव रहा है। इस्लामाबाद स्थित एक सामरिक विशेषज्ञ ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर एशिया टाइम्स से कहा- ‘हकीकत यह है कि अमेरिका का पाकिस्तान की नागरिक सरकार जितना संपर्क रहता है, उससे कहीं बहुत ज्यादा पाकिस्तानी सेना के साथ रहता है। उम्मीद है कि ये संबंध आगे भी बने रहेंगे।’
मगर इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का कहना है कि शाहबाज शरीफ सरकार कुछ दिनों के लिए बनी है। उसके मुताबिक इस साल के अंत तक ही आम चुनाव होंगे, जिसमें पीएमएल-नवाज हार जाएगी। पीटीआई शाहबाज शरीफ की विदेश नीति संबंधी प्राथमिकताओं से सहमत नहीं है। पार्टी के सीनेटर नौमान वजीर ने कहा- ‘यूरोपियन यूनियन और अमेरिका के साथ निकट संबंध बनाने के बजाय नई सरकार को क्षेत्रीय नजरिया अपनाना चाहिए। उसे रूस, चीन, ईरान, मलेशिया और भारत से करीबी रिश्ते कायम करने चाहिए।’
उधर बलूचिस्तान की प्रांतीय सरकार के सलाहकार रह चुके जेन अचाकजई ने कहा है- ‘देश के सामने विशाल आर्थिक चुनौतियां हैं। इस सरकार के लिए उनका हल निकालना संभव नहीं है।’ आलोचकों का कहना है कि इन चुनौतियों की वजह से बढ़ने वाले जन असंतोष का सामना शाहबाज शरीफ नहीं कर पाएंगे। ऐसे में उनकी सरकार अल्पकालिक साबित हो सकती है।