लॉस एंजिल्स में अमेरिका की तरफ से आयोजित ‘समिट ऑफ अमेरिकाज’ (अमेरिका महाद्वीप के देशों का शिखर सम्मेलन) राष्ट्रपति जो बाइडन की प्रतिष्ठा के लिए एक झटका साबित हुआ है। खुद अमेरिकी मीडिया की टिप्पणियों में कहा गया है कि इस सम्मेलन ने लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र में अमेरिका के घटते प्रभाव को साफ कर दिया है।
बाइडन प्रशासन ने क्यूबा, निकरागुआ, और वेनेजुएला के नेताओं को इस सम्मेलन के लिए आमंत्रित नहीं किया। इसके विरोध में मेक्सिको के राष्ट्रपति आंद्रेस मैनुएल लोपेज ओब्रादोर के साथ-साथ बोलिविया और होंडूरास के वामपंथी राष्ट्रपतियों ने इस आयोजन का बहिष्कार कर दिया। ग्वाटेमाला के राष्ट्रपति एलेयेंद्रो गियामाटेई और एल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायिब बुकेले बाइडन प्रशासन के प्रति अपनी अन्य शिकायतों की वजह से सम्मेलन में नहीं आए। बाइडन प्रशासन ने पहले इन दोनों राष्ट्रपतियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।
वेबसाइट एक्सियोस.कॉम ने अपनी एक टिप्पणी में लिखा है कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो के अलावा लॉस एंजिल्स आए नेताओं में कोई ऐसा नहीं रहा, जिसे बाइडन अपना वैचारिक साथी बता सकें। सम्मेलन में ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सेनारो आए, जिनसे बाइडन ने मुलाकात की। इसको लेकर सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों में कड़ी प्रतिक्रिया हुई है। कई डेमोक्रेटिक नेताओं ने कहा है कि बाइडन ने लोकतंत्र को अपनी नीति में सर्व प्रमुख मानने का वादा किया था। लेकिन उन्होंने लॉस एंजिल्स में बेहिचक बोल्सेनारो से हाथ मिलाया, जिन पर मानव अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के हनन के गंभीर आरोप हैं।
वेबसाइट एक्सियोस ने ध्यान दिलाया है कि लैटिन अमेरिका में इस समय झुकाव वामपंथ की तरफ है। अर्जेंटीना, चिली, और पेरू में हाल में वामपंथी नेता राष्ट्रपति चुने गए हैं, जिन्होंने नव-उदारवाद के खिलाफ संघर्ष का एलान कर रखा है। जबकि नव-उदारवाद अमेरिकी नीतियों का प्रमुख वैचारिक आधार है।