बांग्लादेश में चीन के राजदूत ली जी मिंग और म्यांमार के रखाइन प्रांत के विदेश मंत्री अबुल कलाम अब्दुल मोमेन के बीच रविवार को ढाका में हुई एक बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। मोमेन ने बांग्लादेश से कहा है कि तूफान और बाढ़ की वजह से हर साल विस्थापित और बेघर होने वाले बांग्लादेशी नागरिकों को भी वहां बसाया जा सकता है।
बांग्लादेश ने 2018 में ही भाषणचार द्वीप को रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए विकसित करने और वहां तमाम ज़रूरी सुविधाएं मुहैय्या कराने का ऐलान कर दिया था। अब जबकि भाषणचार द्वीप बनकर तैयार है और वहां करीब एक लाख रोहिंग्या शरणार्थियों के रहने से लेकर तमाम जरूरी सुविधाएं मुहैय्या करवा दी गई हैं तब कई मानवाधिकार संगठन और देश वहां इन शरणार्थियों को बसाना खतरनाक बता रहे हैं।
दरअसल भाषणचार द्वीप पर हमेशा गंभीर समुद्री तूफान का खतरा मंडराता है और हाई टाईड की स्थिति में द्वीप के पूरी तरह डूब जाने का भी खतरा रहता है। ऐसी तबाही की स्थिति में वहां रोहिंग्या शऱणार्थियों को बसाना उन्हें मौत के मुंह में भेजने जैसा होगा।
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र ने पहले ही रोहिंग्या शरणार्थियों को भाषण चार द्वीप में बसाए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया था। इन तमाम आशंकाओं के मद्देनज़र अब बांग्लादेश भी इस फैसले पर दोबारा सोच रहा है। बगैर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र की सहमति से वह इतना बड़ा फैसला ले भी नहीं सकता।
हालांकि अबतक यह द्वीप बेहद ही खूबसूरती से विकसित कर लिया गया है। हाल ही में बांग्लादेश के पत्राकरों ने वहां जाकर इसका जायजा भी लिया था। लेकिन तूफान से जानमाल के खतरे को देखते हुए म्यांमार और चीन ने बांग्लादेश के साथ मिलकर भाषणचार द्वीप के वैकल्पिक इस्तेमाल के बारे में बात की है। भाषणचार 25 हजार एकड़ में फैला हुआ द्वीप है, जिसका 15 हजार एकड़ क्षेत्र लो टाइड और 10 हजार एकड़ क्षेत्र हाई टाइड से तबाह हो सकता है।
जाहिर है इससे एक बार फिर रोहिंग्या शरणार्थियों के पुनर्वास का मामला लटक गया है। यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या इस खतरे के बारे में पहले से अंदाज़ा नहीं था, अगर था तो इस द्वीप को इतना खर्च करके क्यों विकसित किया गया और रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए उम्मीद की किरण क्यों जगाई गई। रोहिंग्या शरणार्थियों के सवाल पर कई देश राजनीतिक रोटियां सेंक कर उन्हें चुनावी मुद्दा भी बनाते रहे हैं, ऐसे में क्या फिर उन्हें बसाने के लिए फिर कोई नई और लंबी चौड़ी दीर्घकालिक योजना बनेगी?