पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज
- फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक दौरे पर हैं। यह यात्रा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर हो रही है। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, नई तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने पर चर्चा होगी। माना जा रहा है कि यह दौरा भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को नई दिशा देगा।
ऐसे में आइए जानते हैं कि दोनों देशों के रिश्ते कितने पुराने हैं? दोनों के व्यापारिक रिश्ते कैसे मजबूत हुए? दोनों देशों में कितना व्यापार होता है? किस क्षेत्र पर ज्यादा फोकस किया गया है? भारतीय प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने कब-कब ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया? पीएम मोदी का यह दौरा क्यों खास है?
भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध
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चार साल में दोगुना हुआ भारत का ऑस्ट्रेलिया को निर्यात
पिछले चार वर्षों में भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग व व्यापार समझौते का असर दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में साफ दिखाई दिया है। इस समझौते से दोनों देशों को एक-दूसरे के बाजारों तक बेहतर पहुंच मिली है और व्यापार में आने वाली कई बाधाएं भी कम हुई हैं। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया को भारत का निर्यात दोगुने से भी अधिक बढ़ गया।
- वित्त वर्ष 2020-21 में यह करीब चार अरब अमेरिकी डॉलर था, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंच गया।
- वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 24.1 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इसी अवधि में ऑस्ट्रेलिया को भारत का निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में आठ प्रतिशत बढ़ा।
- वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में (फरवरी 2026 तक) दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 19.3 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया।
अब सीईसीए पर क्यों है नजर?
ईसीटीए के बाद अब दोनों देश व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) पर बातचीत कर रहे हैं। अब तक 11 दौर की वार्ता पूरी हो चुकी है। यह समझौता लागू होने पर दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, निवेश और बाजार तक पहुंच और आसान हो जाएगी। इससे आर्थिक संबंध पहले से ज्यादा मजबूत होंगे।
व्यापार बढ़ाने के लिए और क्या कदम उठाए गए?
- दोनों देशों के बीच लगातार उच्च स्तरीय बैठकें हो रही हैं।
- मार्च 2023 में मुंबई में भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम की पहली बैठक हुई।
- जनवरी 2024 में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में ऑस्ट्रेलिया भागीदार देश बना।
- अगस्त 2024 में एडिलेड में संयुक्त मंत्रिस्तरीय आयोग की 19वीं बैठक हुई।
- फरवरी 2025 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने के लिए नया रोडमैप भी जारी किया।
रक्षा और रणनीतिक सहयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत और ऑस्ट्रेलिया इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार हैं।
2021 में दोनों देशों ने सैन्य रसद सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, रक्षा तकनीक और सुरक्षा सहयोग लगातार बढ़ा है।
दोनों देश क्वाड समूह के सदस्य हैं और मालाबार नौसैनिक अभ्यास में भी साथ हिस्सा लेते हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और मुक्त समुद्री मार्ग सुनिश्चित करना है।
हरित ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग
- दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी तेजी से सहयोग बढ़ा रहे हैं।
- 2024 में भारत-ऑस्ट्रेलिया नवीकरणीय ऊर्जा साझेदारी शुरू की गई। इसके तहत ग्रीन हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, सौर आपूर्ति शृंखला, ग्रीन स्टील, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और महत्वपूर्ण खनिजों पर मिलकर काम किया जा रहा है।
- भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ ऊर्जा उद्योग के विस्तार के लिए ऑस्ट्रेलिया के लिथियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की बड़ी भूमिका मानी जा रही है।
शिक्षा के क्षेत्र में मिला बढ़ावा
- शिक्षा दोनों देशों की साझेदारी का अहम आधार बन चुकी है।
- फरवरी 2024 तक लगभग 1.20 लाख भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे थे।
- भारत ऑस्ट्रेलिया के लिए अंतरराष्ट्रीय छात्रों का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है।
- 2023 में दोनों देशों ने एक-दूसरे की डिग्रियों को मान्यता देने का समझौता किया।
- इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया की कई यूनिवर्सिटी भारत में अपने परिसर खोल रही हैं।
भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध
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